छुईखदान। बारिश के मौसम में पर्यटकों की आवाजाही से गुलजार रहने वाला नथेला क्षेत्र का पिपरिया जलाशय बुधवार को एक दर्दनाक हादसे का गवाह बना। दोस्तों के साथ घूमने पहुंचे भिलाई हाउसिंग बोर्ड निवासी 17 वर्षीय आर्यन सिंह की जलाशय में डूबने से मौत हो गई। आर्यन 12वीं कक्षा का छात्र था। हादसे के बाद जलाशय क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
जानकारी के अनुसार आर्यन चार दोस्तों के साथ बाइक और मोपेड से पिपरिया जलाशय घूमने पहुंचा था। सुबह करीब 11 बजे सभी जलाशय के पास मौजूद थे। इसी दौरान आर्यन पानी में उतर गया। आगे बढ़ने के दौरान अचानक उसका पैर फिसल गया और वह जलाशय के गहरे हिस्से में चला गया।
दोस्तों ने बचाने की कोशिश की, लेकिन नहीं कर सके मदद
आर्यन के पानी में फंसने के दौरान उसके दोस्त मौके पर ही मौजूद थे। बताया गया कि आर्यन ने मदद के लिए आवाज लगाई, लेकिन दोस्तों को तैरना नहीं आता था। ऐसे में वे चाहकर भी उसे बाहर नहीं निकाल सके। इसके बाद एक दोस्त ने तत्काल 112 पर सूचना दी।
सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और छात्र की तलाश शुरू की गई। काफी प्रयास के बाद कांटे की मदद से आर्यन को पानी से बाहर निकाला गया। हालांकि तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। हादसे की सूचना मिलने के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है।
पर्यटकों की भीड़, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था नाकाफी
पिपरिया जलाशय और नथेला क्षेत्र में बारिश के दौरान बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। प्राकृतिक नजारे और आसपास के झरने लोगों के आकर्षण का केंद्र रहते हैं। इसके बावजूद जलाशय के संवेदनशील और गहरे हिस्सों में सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं होने की बात सामने आ रही है।
स्थानीय लोगों के अनुसार कई जगह जलाशय का क्षेत्र खुला है। गहरे पानी वाले स्थानों पर पर्याप्त चेतावनी बोर्ड, तार फेंसिंग, निगरानी और बचाव दल जैसी व्यवस्थाओं की जरूरत है। लोगों का कहना है कि पर्यटकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासन को बरसात शुरू होने से पहले ही सुरक्षा इंतजाम कर लेने चाहिए।
हादसे के बाद फिर उठी स्थायी सुरक्षा की मांग
घटना के बाद स्थानीय लोगों ने जलाशय के आसपास दुर्घटना संभावित स्थानों को चिह्नित कर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि गहरे पानी वाले क्षेत्रों में फेंसिंग, बाउंड्रीवाल, चेतावनी बोर्ड और नियमित निगरानी की व्यवस्था जरूरी है।
पिपरिया जलाशय में हुई इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि पर्यटन स्थलों पर लोगों की बढ़ती भीड़ के साथ सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ाई जा रही है या नहीं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से नियमित निरीक्षण कर आवश्यक कदम उठाने की मांग की है, ताकि भविष्य में किसी दूसरे परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े।



