देवभोग। खेती को केवल परंपरागत काम मानने के बजाय शिक्षक अवनीश ने इसे आत्मनिर्भरता और अतिरिक्त आमदनी का मजबूत माध्यम बना दिया है। नौकरी के साथ खेती में लगातार नए प्रयोग करते हुए उन्होंने अपने खेत को ऐसी बहुफसली व्यवस्था में विकसित किया है, जहां सालभर अलग-अलग फसलों का उत्पादन लिया जा रहा है। उनकी मेहनत और प्रयोग से खेती अब परिवार के लिए लाखों रुपये की आय का जरिया बन गई है।
शिक्षक अवनीश के खेत में धान और गेहूं जैसी प्रमुख फसलों के साथ दालें, मसाले, विभिन्न प्रकार की सब्जियां और फलदार पौधे भी लगाए गए हैं। एक ही परिसर में अलग-अलग मौसम के अनुसार फसलों का चयन करने से जमीन का बेहतर उपयोग हो रहा है। इससे जहां खेत खाली नहीं रहता, वहीं एक फसल पर निर्भरता भी कम होती है।
अवनीश का कहना है कि खेती में सफलता के लिए केवल मेहनत ही नहीं, बल्कि सही योजना और समय के अनुसार फसल का चयन जरूरी है। बाजार की मांग को ध्यान में रखकर वे खेती की योजना तैयार करते हैं। जैविक खाद और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग पर भी उनका जोर रहता है।
खेती के साथ नई तकनीक पर जोर
शिक्षक होने के कारण अवनीश खेती में नई जानकारी और आधुनिक तकनीकों को अपनाने में भी रुचि रखते हैं। फसल चयन, सिंचाई, खाद प्रबंधन और मौसम के अनुसार खेती में बदलाव कर वे उत्पादन बढ़ाने का प्रयास करते हैं। उनका खेत आसपास के किसानों के लिए भी सीखने का माध्यम बन रहा है।
नौकरी के साथ खेती से आत्मनिर्भरता
अवनीश ने साबित किया है कि नौकरी के साथ व्यवस्थित तरीके से खेती की जाए तो अतिरिक्त आय के साथ आत्मनिर्भरता की राह भी तैयार की जा सकती है। उनका प्रयोग उन युवाओं और किसानों के लिए प्रेरणादायक है, जो खेती को आधुनिक तरीके से अपनाकर अपनी आमदनी बढ़ाना चाहते हैं।



