अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले कानून के तहत प्रस्तावित अतिरिक्त टैरिफ को फिलहाल रोक दिया है। ट्रंप ने शुक्रवार को इस संबंध में कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए। उन्होंने कहा कि यह फैसला अमेरिका के राष्ट्रीय हित में लिया गया है।
इस कानून के तहत रूस से तेल और गैस खरीदने वाले भारत और चीन जैसे देशों पर 100% तक अतिरिक्त टैरिफ लगाया जा सकता था। इसका मकसद रूस की कमाई पर रोक लगाकर यूक्रेन के खिलाफ युद्ध के लिए उसकी फंडिंग को मुश्किल बनाना था। खास बात यह है कि ट्रंप ने 9 अक्टूबर को ही रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ डीजल खरीदने का समझौता किया था।
क्या है ट्रंप का फैसला?
व्हाइट हाउस की ओर से जारी आदेश के अनुसार, ट्रंप ने ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ के तहत आने वाले कई प्रतिबंधों, पाबंदियों और शुल्कों से छूट दी है। आदेश में कहा गया है कि यह छूट अमेरिका के राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखते हुए दी गई है।
इस कानून में रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रावधान शामिल था। इसके तहत कुछ देशों से अमेरिका आने वाले सामान पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क लगाया जा सकता था। नए आदेश के बाद फिलहाल इस कानून के तहत प्रस्तावित शुल्क लागू करने पर रोक लग गई है। हालांकि, आदेश में भविष्य में दोबारा कार्रवाई की गुंजाइश भी रखी गई है।
भारत के लिए क्यों अहम है यह फैसला?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है। रूस से तेल खरीद को लेकर अमेरिका की ओर से अतिरिक्त टैरिफ लगाए जाने की आशंका भारतीय निर्यातकों और कारोबार के लिए चिंता का विषय थी।
ट्रंप के ताजा आदेश से रूस से ऊर्जा खरीदने के मुद्दे पर भारत के खिलाफ इस कानून के तहत अतिरिक्त शुल्क लगाए जाने का खतरा फिलहाल टल गया है। इससे भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े मामलों में आगे बातचीत के लिए भी गुंजाइश बनी रहेगी।
सितंबर में कानून पर किए थे हस्ताक्षर
ट्रंप ने 18 सितंबर 2026 को ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ पर हस्ताक्षर किए थे। कानून का उद्देश्य रूस के ऊर्जा और रक्षा क्षेत्रों पर आर्थिक दबाव बढ़ाना तथा प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाली गतिविधियों पर कार्रवाई करना था।
इस कानून में रूस से तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले देशों पर भी अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रावधान किया गया था। अब ट्रंप ने राष्ट्रीय हित के आधार पर इसके कई प्रावधानों के क्रियान्वयन से छूट दी है। यह छूट आगे राष्ट्रपति या संबंधित अमेरिकी अधिकारियों के निर्णय के आधार पर बदली जा सकती है।



