लिलेश डोंगरे
देवभोग (गरियाबंद)। क्षेत्र में ग्रामीणों की सुविधा और सामुदायिक कार्यक्रमों के लिए बनाया गया सामुदायिक भवन वर्तमान में बदहाली का शिकार हो चुका है। लंबे समय से देखरेख और आवश्यक रखरखाव के अभाव में भवन की हालत लगातार खराब होती जा रही है। स्थिति यह है कि भवन अब सामान्य मरम्मत से भी सुधरने की स्थिति में नजर नहीं आ रहा है।
भवन की दीवारों, छत और अन्य हिस्सों में समय के साथ जर्जरता बढ़ती जा रही है। जगह-जगह टूट-फूट और खराब रखरखाव के कारण भवन का उपयोग करना भी मुश्किल होता जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि सामुदायिक भवन का निर्माण जिस उद्देश्य से किया गया था, वह उद्देश्य ही अब पूरा होता नजर नहीं आ रहा है।
जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल
ग्रामीणों के अनुसार भवन की स्थिति लंबे समय से खराब है, लेकिन समय रहते इसकी मरम्मत और रखरखाव पर ध्यान नहीं दिया गया। यदि शुरुआती दौर में ही आवश्यक मरम्मत करा दी जाती तो भवन को इस हालत तक पहुंचने से बचाया जा सकता था। अब स्थिति गंभीर होने के बाद इसकी मरम्मत पर होने वाले खर्च को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा लाभ
सामुदायिक भवन का निर्माण स्थानीय लोगों के सामाजिक एवं सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए किया गया था। लेकिन भवन की जर्जर स्थिति के चलते ग्रामीण इसका पहले की तरह उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। इससे सार्वजनिक सुविधा के रूप में बनाया गया भवन धीरे-धीरे अनुपयोगी होता जा रहा है।
ग्रामीणों ने संबंधित विभाग और स्थानीय प्रशासन से मांग की है कि भवन का मौके पर निरीक्षण कराया जाए और इसकी वास्तविक स्थिति की जांच कराई जाए। यदि भवन मरम्मत योग्य नहीं है तो तकनीकी जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई करते हुए नए भवन अथवा पुनर्निर्माण की दिशा में पहल की जाए।
अब देखना होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इस जर्जर सामुदायिक भवन की सुध कब लेते हैं और ग्रामीणों को इस समस्या से कब तक राहत मिलती है।



