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                <title>विचार/ लेख - Khaskhabar News</title>
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                <title>त्वरित टिप्पणी : जांजगीर में सत्ता का जश्न, सौगात शून्य</title>
                                    <description><![CDATA[<p><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>जांजगीर।</strong></span><br />छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार के दो वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर 22 दिसंबर को जांजगीर में आयोजित जनादेश परब सत्ता के उत्सव से ज़्यादा आत्मप्रचार का मंच बनकर रह गया। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सहित पूरी साय कैबिनेट की मौजूदगी के बावजूद न जांजगीर जिले को और न ही पूरे छत्तीसगढ़ को एक ढेले की सौगात मिल सकी।</p>
<p>भारी-भरकम मंच, प्रशासनिक संसाधन और जुटाई गई भीड़ के बीच नेताओं ने अपने ही कार्यकाल का गुणगान किया। मंच से विकास, सुशासन और उपलब्धियों के दावे किए गए, लेकिन जमीनी हकीकत पर कोई नई घोषणा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.khaskhabar.news/other/quick-comment-celebration-of-power-in-janjgir-gift-zero/article-4124"><img src="https://www.khaskhabar.news/media/400/2025-12/whatsapp-image-2025-12-22-at-19.21.49.jpeg" alt=""></a><br /><p><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>जांजगीर।</strong></span><br />छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार के दो वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर 22 दिसंबर को जांजगीर में आयोजित जनादेश परब सत्ता के उत्सव से ज़्यादा आत्मप्रचार का मंच बनकर रह गया। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सहित पूरी साय कैबिनेट की मौजूदगी के बावजूद न जांजगीर जिले को और न ही पूरे छत्तीसगढ़ को एक ढेले की सौगात मिल सकी।</p>
<p>भारी-भरकम मंच, प्रशासनिक संसाधन और जुटाई गई भीड़ के बीच नेताओं ने अपने ही कार्यकाल का गुणगान किया। मंच से विकास, सुशासन और उपलब्धियों के दावे किए गए, लेकिन जमीनी हकीकत पर कोई नई घोषणा या ठोस समाधान सामने नहीं आया। राष्ट्रीय अध्यक्ष नड्डा ने भी वही रटे-रटाए जुमले दोहराए, जिन्हें जनता पहले भी सुन चुकी है।</p>
<p>आरोप है कि यह आयोजन जनता के पैसे और प्रशासनिक तंत्र की बैसाखी पर करोड़ों के तमाशे में तब्दील हो गया। कर्मचारी वर्ग आज भी अपनी लंबित मांगों को लेकर संघर्षरत है, प्रदेश में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति जस की तस बनी हुई है, लेकिन मंच से छत्तीसगढ़ को खुशहाल बताने में कोई कमी नहीं छोड़ी गई।</p>
<p>सभा में जुटाई गई भीड़ को लेकर भी सवाल उठे हैं। राजनीतिक हलकों का कहना है कि यह दिखावे का पर्व था, जिसमें जनादेश का सम्मान कम और सत्ता का प्रदर्शन अधिक नजर आया। दो वर्षों के कार्यकाल के बाद भी जब न जिले को कुछ मिला और न प्रदेश को, तो अब यह सवाल उठना लाज़मी है कि क्या भाजपा अगली बार भी इसी जनादेश के भरोसे ऐसा पर्व मना पाएगी, या जनता आने वाले समय में सत्ता से उसका असली हिसाब मांगेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>राष्ट्रीय</category>
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                                            <category>देश</category>
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                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Dec 2025 23:44:37 +0530</pubDate>
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                <title>“हिन्दी हमारी संस्कृति और एकता का आधार” - जांगड़े </title>
                                    <description><![CDATA[<p><span style="color:rgb(224,62,45);"><em><strong>जांजगीर-चांपा।</strong></em></span><br />पावरग्रिड के ग्राम तागा स्थित चांपा  उपकेंद्र  में हिन्दी पखवाड़े में 17 सितम्बर को कर्मचारियों एवं अधिकारी परिवार के सदस्यों के लिए निबंध प्रतियोगिता तथा बच्चों के लिए कविता-पाठ का आयोजन हुआ।<br />कार्यक्रम का शुभारंभ उपमहाप्रबंधक   सत्येंद्र जांगड़े और मुख्य प्रबंधक   सुनील कुमार ने किया। विशेष अतिथि के रूप में कवि एवं साहित्यकार  अनुभव तिवारी, व्याख्याता हिंदी   दीपक कुमार यादव और जिला संगठन आयुक्त गाइड कु. श्वेता जायसवाल उपस्थित रहे। संचालन हिन्दी नोडल अधिकारी   प्रशांत कुमार ने किया। <br />शुभारंभ पर   जांगड़े ने कहा कि “हिन्दी हमारी संस्कृति और एकता का आधार है”। उन्होंने बताया कि ऐसे आयोजनों से हिन्दी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.khaskhabar.news/other/hindi-the-basis-of-our-culture-and-unity-jangde/article-4123"><img src="https://www.khaskhabar.news/media/400/2025-09/whatsapp-image-2025-09-18-at-08.18.57.jpeg" alt=""></a><br /><p><span style="color:rgb(224,62,45);"><em><strong>जांजगीर-चांपा।</strong></em></span><br />पावरग्रिड के ग्राम तागा स्थित चांपा  उपकेंद्र  में हिन्दी पखवाड़े में 17 सितम्बर को कर्मचारियों एवं अधिकारी परिवार के सदस्यों के लिए निबंध प्रतियोगिता तथा बच्चों के लिए कविता-पाठ का आयोजन हुआ।<br />कार्यक्रम का शुभारंभ उपमहाप्रबंधक   सत्येंद्र जांगड़े और मुख्य प्रबंधक   सुनील कुमार ने किया। विशेष अतिथि के रूप में कवि एवं साहित्यकार  अनुभव तिवारी, व्याख्याता हिंदी   दीपक कुमार यादव और जिला संगठन आयुक्त गाइड कु. श्वेता जायसवाल उपस्थित रहे। संचालन हिन्दी नोडल अधिकारी   प्रशांत कुमार ने किया। <br />शुभारंभ पर   जांगड़े ने कहा कि “हिन्दी हमारी संस्कृति और एकता का आधार है”। उन्होंने बताया कि ऐसे आयोजनों से हिन्दी के प्रति जागरूकता बढ़ती है और राजभाषा के प्रयोग को प्रोत्साहन मिलता है।</p>
<p><img src="https://www.khaskhabar.news/media/2025-09/whatsapp-image-2025-09-18-at-08.19.01.jpeg" alt="WhatsApp Image 2025-09-18 at 08.19.01" width="1000" height="750"></img><br />विशेष अतिथि   अनुभव तिवारी ने कविता-पाठ के माध्यम से सभी को प्रेरित किया। व्याख्याता  दीपक कुमार यादव ने बच्चों की प्रस्तुतियों की सराहना की और पावरग्रिड परिवार का आभार व्यक्त किया। कु. श्वेता जायसवाल ने महिलाओं की सक्रिय भागीदारी पर कहा कि पारिवारिक जिम्मेदारियों के बावजूद महिलाएँ अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर तलाशें।<br />हिन्दी नोडल अधिकारी  प्रशांत कुमार ने पखवाड़े के दौरान आयोजित होने वाली प्रतियोगिताओं, कार्यशालाओं और क्विज़ जैसे कार्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इन गतिविधियों से कर्मचारियों में हिन्दी के प्रति अभिरुचि और आत्मीयता विकसित होगी। इस अवसर पर तीनो आमंत्रित निर्णायकों का सम्मान पॉवरग्रिड  परिवार ने किया ।<br />कार्यक्रम में उपकेंद्र के अधिकारी और कर्मचारी बड़ी संख्या में शामिल हुए और सभी ने हिन्दी के प्रचार-प्रसार में सहयोग देने का संकल्प लिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>खेल</category>
                                            <category>विचार/ लेख</category>
                                            <category>अन्य</category>
                                            <category>खबर विशेष</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़ विशेष</category>
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                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Thu, 18 Sep 2025 08:26:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Khaskhabar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पावरग्रिड र में हिन्दी पखवाड़े का शुभारंभ</title>
                                    <description><![CDATA[<h5><span style="color:rgb(224,62,45);"><em><strong>जांजगीर चांपा//</strong></em></span></h5>
<p><br />हिन्दी दिवस पर हिन्दी पखवाड़े का शुभारंभ ग्राम तागा स्थित पावरग्रिड चांपा उपकेंद्र में किया गया। इस कार्यक्रम का उद्घाटन उपकेंद्र के महाप्रबंधक श्री हिमाद्रि बोस ने किया।<br />उद्घाटन अवसर पर श्री बोस ने कहा कि हिन्दी केवल संवाद की भाषा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और एकता का आधार है। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों से आग्रह किया कि वे कार्यक्षेत्र में हिन्दी का अधिक से अधिक प्रयोग करें, ताकि राजभाषा का प्रभाव और सशक्त रूप सामने आ सके।<br />कार्यक्रम में हिन्दी नोडल अधिकारी श्री प्रशांत कुमार ने हिन्दी पखवाड़े के दौरान आयोजित होने वाली प्रतियोगिताओं, कार्यशालाओं और रचनात्मक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.khaskhabar.news/news-special/68bd60ca980a5/article-4120"><img src="https://www.khaskhabar.news/media/400/2025-09/whatsapp-image-2025-09-15-at-09.18.01.jpeg" alt=""></a><br /><h5><span style="color:rgb(224,62,45);"><em><strong>जांजगीर चांपा//</strong></em></span></h5>
<p><br />हिन्दी दिवस पर हिन्दी पखवाड़े का शुभारंभ ग्राम तागा स्थित पावरग्रिड चांपा उपकेंद्र में किया गया। इस कार्यक्रम का उद्घाटन उपकेंद्र के महाप्रबंधक श्री हिमाद्रि बोस ने किया।<br />उद्घाटन अवसर पर श्री बोस ने कहा कि हिन्दी केवल संवाद की भाषा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और एकता का आधार है। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों से आग्रह किया कि वे कार्यक्षेत्र में हिन्दी का अधिक से अधिक प्रयोग करें, ताकि राजभाषा का प्रभाव और सशक्त रूप सामने आ सके।<br />कार्यक्रम में हिन्दी नोडल अधिकारी श्री प्रशांत कुमार ने हिन्दी पखवाड़े के दौरान आयोजित होने वाली प्रतियोगिताओं, कार्यशालाओं और रचनात्मक गतिविधियों की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि इस आयोजन का उद्देश्य कर्मचारियों में हिन्दी के प्रति जागरूकता और अभिरुचि बढ़ाना है।<br />इस अवसर पर विभिन्न वक्ताओं ने भी हिन्दी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राजभाषा के रूप में हिन्दी को अपनाना हम सभी की जिम्मेदारी है। हिन्दी पखवाड़े के दौरान निबंध, वाद-विवाद, कविता-पाठ और क्विज़ जैसी गतिविधियाँ आयोजित की जाएँगी, जिनमें कर्मचारियों को सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया गया।<br />कार्यक्रम में उपकेंद्र के अधिकारी और कर्मचारी उत्साहपूर्वक शामिल हुए और सभी ने हिन्दी के प्रचार-प्रसार में सहयोग देने का संकल्प लिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>विचार/ लेख</category>
                                            <category>खबर विशेष</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़ विशेष</category>
                                            <category>ब्रेकिंग</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Sep 2025 12:58:51 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>पं. माधवराव सप्रे की जयंती 19  जून  2025 पर विशेष</title>
                                    <description><![CDATA[जन्म-19-06-1871 जयंती-19-06-2025]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.khaskhabar.news/other/pt-madhavrao-sapres-birth-anniversary-on-19-june-2025/article-4067"><img src="https://www.khaskhabar.news/media/400/2025-06/ling.jpg" alt=""></a><br /><p>“मैं महाराष्ट्री हूँ, परंतु हिंदी के विषय में मुझे उतना ही अभिमान है, जितना किसी हिंदी भाषी को हो सकता है। मै चाहता हूँ, कि इस राष्ट्रभाषा मे सामने भारतवर्ष का प्रत्येक व्यक्ति इस बात को भूल जावे कि मैं महाराष्ट्री हूँ, मैं बंगाली हूँ, मैं गुजराती हूँ, या मै मद्रासी हूँ। ये मेरे 35 वर्ष के विचार है, और तभी से मैंने इस बात का निश्चय कर लिया है, कि मैं आजीवन हिंदी भाषा की सेवा करता रहूँगा।“<br />भरतपुर हिंदी सम्पादक सम्मेलन(1927) के अध्यक्षीय उद्बोधन मे कर्मवीर के संपादक श्री पं.माखनलाल चतुर्वेदी के कथनानुसार “आज की हिंदी भाषा के युग को पण्डित महावीर प्रसाद जी व्दिवेदी व्दारा निर्मित तथा तेज को पण्डित माधवराव सप्रे व्दारा निर्मित कहना चाहिए। ” </p>
<blockquote class="format2"><span style="color:rgb(186,55,42);"><em><strong>“कर्म है अपना जीवन प्राण/ कर्म में बसते है भगवान</strong></em></span><br /><span style="color:rgb(186,55,42);"><em><strong>कर्म है मातृभूमि का मान/ कर्म पर आओ हो बलिदान”</strong></em></span></blockquote>
<p>सप्रे जी ने भारत की राष्ट्रीयता का शंखनाद किया और अर्थशास्त्र की हिंदी शब्दावली तैयार की तो हिंदी पत्रकारिता को संस्कारित किया हिंदी समालोचना शास्त्र का विकास किया। आज से 154 वर्ष पहले जन्म लिए हमारे माधवराव सप्रे जी का परिवार , कभी मराठा शासकों की प्रशासनिक व्यवस्था सँभालने के लिए महाराष्ट्र से  मध्यप्रदेस के दमोह जीले आये। सप्रे परिवार कई पीढ़ियों तक संपन्न और खुशहाल था। फिर वक्त के थपेड़ो मे विपन्न हुआ। रोजी-रोटी के लिए विस्थापित हुआ। माधवराव कुशाग्र बुध्दि के थे, उस समय बी.ए, पास करना बहुत कठिन माना जाता था। <br />पंडित माधवराव सप्रे जी को देश के अनेक मनीषियों ने इनके अवदान को अपने नजरिए से देखते हुए उनके बहुआयामी व्यक्तित्व के विस्तृत रूप के बारे में कहा कि वे कर्मयोगी, चिंतक, हिंदी मे समालोचना का प्रवर्तक, निष्पृह देश प्रेमी, पिछड़े क्षेत्र (छतीसगढ़) में पत्रकारिता के पुरोधा, योगी और आदर्श महामानव कहा है और माना भी है। मातृ भाषा मराठी होने के कारण व उनके जीवन मे महाराष्ट्र के चिपलूणकर, लोकमान्य तिलक, आगरकर का आदर्श उनकी आँखों के सामने हमेशा झूलता रहता था। उनका कहना था के जब ये महानुभव पत्र, लेखन और भाषण के व्दारा अपनी सोई हुई जनता को जगाने का कार्य कर सकते है, तो मैं क्यों न इन्हीं का अनुसरण करूँ? इसी के साथ उनके अंदर देशसेवा की अन्तःप्रेरणा इतनी प्रबल थी कि न तो वो कभी सरकारी नौकरी की तरफ आकर्षित हुए और न तो वकालत करने का सोचा धन कमाने के लिए।   </p>
<p><img src="https://www.khaskhabar.news/media/2025-06/m.jpg" alt="m" width="1557" height="1565"></img><br />पंडित माधवराव सप्रे का जन्म 19 जून 1871 को मध्य प्रदेश के पथरिया (जिला दमोह) गांव में हुआ था। वे हिंदी भाषा के वरिष्ठतम पत्रकार और साहित्यकार थे, उनके जीवन में कार्य क्षेत्र का स्थल मध्य-प्रदेश व छतीसगढ़ अधिकतम रहा।  जिन्होंने छत्तीसगढ़ राज्य में पत्रकारिता की नींव रखी। उनकी प्रारंभिक शिक्षा छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में अपने मझले भाई बाबूराव के पास रहकर हुई। मिडिल की परीक्षा उन्होंने 1887 मे अच्छे अंकों से पास करने के कारण उन्हें 7रूपये की छात्रवृति मिलने लगी थी। हाई स्कूल की शिक्षा रायपुर में की जहाँ श्री नंदलाल दुबे और श्री बामनराव ओक उनके शिक्षक थे। इन्हीं शिक्षकों की प्रेरणा से सप्रे जी को हिंदी मे लेखन के लिए प्रोत्साहन मिला । उन्होंने उच्च शिक्षा जबलपुर, ग्वालियर और नागपुर में प्राप्त की।<br />उनको सरकारी नौकरी के अवसर मिले परंतु उन्होंने कोई सरकारी नौकरी नहीं की और आजीवन हिंदी भाषा और देश की सेवा करने का संकल्प लिया। सप्रे जी का व्यक्तित्व और कृतित्व साहित्यकारों और पत्रकारों सहित आम जनता के लिए भी प्रेरणादायी है। कानुन की पढ़ाई बीच मे ही छोड़कर अत्मनिर्भर बनने की इच्छा से 50 रूपये मासिक पेंड्रारोड़ के राजकुमार के शिक्षक हो गए। उन पर बालगंगाधर तिलक की विचारधारा का प्रभाव बहुत ही अधिक था। नौकरी से पैसा बचाकर हिंदी की एक मासिक पत्र निकाल कर देश की सेवा करना चाहते थे। यहीं मित्रों के सहयोग से सिक पत्रिका को अंतिम रूप मिला। पत्र का नाम “छतीसगढ़ मित्र”  पंडित माधव राव सप्रे ने जनवरी, 1900 में श्री रामराव चिंचोलकर के सहयोग से छत्तीसगढ़ के पेंड्रा (जिला बिलासपुर के पेन्ड्रारोड़ नामक जगह से) हिंदी मासिक पत्रिका "छत्तीसगढ़ मित्र" का संपादन एवं प्रकाशन प्रारंभ किया। यह तत्कालीन छत्तीसगढ़ राज्य में हिंदी भाषा की पहली पत्रिका थी। अतः शिक्षा और जनजागरण के प्रचार-प्रसार की इसकी पहली जिम्मेदारी थी। इसके प्रवेशांक में ही ‘आत्म परिचय’ शीर्षक से संपादक ने लिखा है “सम्प्रति छतीसगढ़ विभाग को छोड़ ऐसा एक भी प्रान्त नहीं है जहां दैनिक , साप्ताहिक, मासिक या त्रैमासिक पत्र प्रकाशित न होता हो। इसमें कुछ संदेह नहीं कि सुसंपादित पत्रों के व्दारा हिंदी भाषा की उन्नति हुई है। अतएव यहाँ भी “छतीसगढ़ मित्र” हिंदी भाषा की उन्नति करने में विशेष प्रकार से घ्यान दे। आजकल भाषा में बहुत कूड़ा कर्कट जमा हो रहा है, वह न होने पावे इसलिए प्रकाशित ग्रंथों पर प्रसिध्द मार्मिक विव्दवानों के व्दारा समालोचना भी करें। “ स्पष्ट है कि यह पत्र पिछड़े क्षेत्र में शिक्षा के प्रसार, हिंदी को परिमार्जित करने और समालोचना को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से निकाला गया था। इस पत्रिका में प्रकाशित "सप्रे जी" की कहानी "टोकरी भर मिट्टी" को हिंदी की पहली मौलिक कहानी होने का गौरव प्राप्त है। इस पत्र के विषय में यह कहने मे कोई संदेह नहीं की यह पत्र तत्कालीन मानदण्डों से परिपूर्ण पत्र था। समाचार, कहानियाँ, कविताएँ , प्रर्थना, छोटे-छोटे व्यंग्यात्मक और उपदेशात्मक लेख, प्रेरित पत्र, नीति शास्त्र से संबंधित सामाग्री, समालोचनाएँ लगातार छपती थी। इस पत्र को कोलकता के ‘भारत मित्र’ के संपादक की सराहनीय प्रशंसा मिली और लगातार जारी रखने के प्रति शुभकामनाएँ। परंतु मुद्रण रायपुर फिर नागपुर से होता था उस समय आज की तरह विज्ञापनों का चलन नहीं था जिसके कारण वो मात्र ग्राहक शुल्क पर निर्भर व उसके व्दारा ही निकलने वाला पत्र था । कुछ समय पश्चात बंद कर सप्रे जी नागपुर चले गये वहां से उन्होंने राष्ट्रीय साहित्य के निर्माण का कार्य शुरू किया जो ‘हिंदी ग्रंथमाला’ के रूप मे 1905-1906   <br />उन्होंने कई महत्वपूर्ण पुस्तकों की रचना की तथा लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक द्वारा लिखित "गीता रहस्य" का जो मराठी में लिखा गया था। उसका हिन्दी अनुवाद भी किया। सप्रे जी ने राव बहादुर चिन्तामणि विनायक वैद्य कृत मराठी ग्रन्थ "श्रीमन महाभारत-मीमांसा" का सरल हिन्दी में अनुवाद "महाभारत मीमांसा" के नाम से किया।<br />छत्तीसगढ़ राज्य को स्वर्गीय पंडित माधव राव सप्रे जैसे महान तपस्वी और सफल लेखक और पत्रकार के रूप में गौरव प्राप्त है। स्वतंत्रता संग्राम के दिनों में सप्रे जी ने अपनी लेखनी से आम जनता में राष्ट्रीय चेतना के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने 1912 में रायपुर में जानकी देवी कन्या विद्यालय की स्थापना की और 1920 में राष्ट्रीय विद्यालय की स्थापना में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।<br />सप्रे जी ने हिंदी साहित्यकारों को संगठित करने के लिए मई 1906 में नागपुर से हिंदी गणितीय पत्रिका का प्रकाशन शुरू किया, लेकिन राष्ट्रवादी विचारों पर आधारित इस पत्रिका की बढ़ती लोकप्रियता के कारण तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने 1908 में इसका प्रकाशन बंद कर दिया। इतना ही नहीं, ब्रिटिश सरकार ने 22 अगस्त 1908 को उन्हें भारतीय दंड संहिता की धारा 124 (ए) के तहत आजीवन कारावास की सजा भी सुनाई और उन्हें जेल हो गई हिरासत में उनकी तबीयत खराब होने लगी। इसी समय उनके मंझले भाई बाबूराव की तबीयत भी ठीक नहीं रहती थी, जिनके ऊपर पूरे परिवार के भरण-पोषण का दायित्व था। वे सरकारी नौकरी मे थे। घर की दशा बहुत कराब थी। सप्रे जी के कुछ महीनों बाद वे जेल से उनके मित्रों ने उनके भाई बाबूराव के दबाव में माफीनामा लिख कर के रिहा होने का प्रस्ताव रखा। जो सप्रेजी को स्वीकार नहीं था। परंतु भाई बाबूराव की आत्महत्या की धमकी के कारण सप्रे जी को माफीनामें पर उनके व्दारा हस्ताक्षर करने को विवश होना पड़ा। उन्हें सशर्त रिहा करवा दिए गया। यद्यपि वे जानते थे कि उनके सार्वजनिक जीवन का सत्यानाश हो जाएगा। पर इस कष्ट का बोध जीवन भर उनके साथ रहा।  इस रिहाई से परिवार को तो राहत मिली पर वे खुद को कभी माफ न कर पाए। इसके परिणाम स्वरूप कठोर प्रयाश्चित का मार्ग चुना , शांति और भावी मार्ग की तलाश मे वर्धा के निकट हनुमानगढ़ मे गुरूवर पं. श्रीधर पराँजपे के आश्रम मे गए, गुरू आज्ञा से 13 माह एकान्तवास मे बिताए। मधुकरी वृत्ति अपनाई। पगड़ी, जूते-चप्पल तक परित्याग कर दिया। मन की पवित्रता के लिए साधु का जीवन व्यतीत किया। पश्चात रायपुर(छतीसगढ) रामदासीमठ की स्थापना की, आध्यात्मिकता की ओर निकल पड़े और अध्यावास और भजन-प्रवचन करते समय बिताने लगे। गुरूदेव जी के परामर्श पर उन्होंने श्रीसमर्थ स्मर्थ रामदास कृत “दासबोध “ का पारायम करते हुए उसका हिंदी अनुवाद 1910 में किया और 1913 में वह प्रकाशित हुआ। उसके बाद लोकमान्य तिलक जी का “गीता रहस्य” के अनुवाद का दायित्व भी संभाला 1915 में ‘श्रीमद्भगवतगीता रहस्य अथवा कर्मयोगशास्त्र’ का अनुवाद पूर्ण कर दिया जिसका प्रकाशन 1916 में मे हुआ। इन दोनों ग्रंथों के अनुवाद ने सप्रे जी की क्षमता को जो लोकप्रियता मिली वह शब्दों में बांध पाना कठिन है। लगभग 8 (आठ) वर्षों के एकांतवास के पश्चात सप्रे जी 1916 के नवंबर माह में हिंदी साहित्य सम्मेलन के जबलपुर अधिवेशन में सार्वजनिक रूप से सामने आए।<br />उन्होंने प्रस्ताव जो रखा वो स प्रकारः” भारत वर्ष में शिक्षा प्रसार और विद्या की न्नति के लिए आवश्यक है कि शिक्षा का माध्यम देसी भाषा हो।” इस जगह पर जबलपुर के प्रसिध्द सेठ गोविंददास का परिचय सप्रे जी से हुआ वे जीवनपर्यंत सप्रे जी के शिष्यवत् रहे।1919 में हिंदी साहित्य सम्मेलन के पटना अधिवेशन मे सप्रे जी का प्रस्ताव था-“ इस सम्मेलन की सम्मति मे इस बात का त्यंत आवश्यकता है कि राष्ट्रभाषा हिंदी के साहित्य की सर्वागीण उन्नति के लिए देश मे कम से सम एक ऐसी संस्था स्थापित की जाए जहाँ लेखकगण आजीवन साहित्य सेवा के लिए रखे जावें जिनके व्दारा साहित्य के भिन्न-भिन्न अंगों पर उत्तमोत्तम ग्रन्थ निर्माण किए जावें।“ प्रस्ताव की प्रतिक्रिया के स्वरूप सेठ गोविंददास जी व्दारा जबलपुर का उनका शारदा भवन ‘राष्ट्रीय हिंदी मंदिर’ बनाने के लिए समर्पित करते हुए कार्यारम्भ करने के लिए 2500 रूपये देने की घोषणा कर दी। संचालन का दायित्व सप्रे जी को सौंपा गया और यहां से मासिक पत्रिका ‘श्रीशारदा’ का प्रकाशन 1920 में शुरू हो गया , पश्चात व्दारका प्रसाद मिश्र को दायित्व दिया गया। पं. माखनलाल चतुर्वेदी के संपादन में ‘कर्मवीर’ जबलपुर से जो बाद में 1922 में बंद हो गया। यहां यह कहना जरूरी होगा की कानपुर मे माखनलाल चतुर्वेदी जी के जेल से वापस आने के बाद ‘’प्रताप’’ निकाला और वही महान पत्रकार गणेश शंकर  विद्यार्थी जी के जेल जाने के कारण सप्रे जी और गणेश जी के आग्रह पर फिर 4 अप्रैल 1925 को खंड़वा मे “कर्मवीर” का पुनःप्रकाशन हुआ ,इस अखबार के प्रथम पृष्ट पर पं. विष्मुदत्त शुक्ल और पश्चात 1926 से पं.विष्णुदत्त शुक्ल के साथ पं. माधवराव सप्रे की स्मडति में लिखा होता था । सप्रे जी ने एकांतवास में ही उन्होंने किन्हीं भी अनुष्ठानों मे नाम नहीं देने का संकल्प ले लिया था इसलिए वे इसके संपादक बनने के लिए राजी नहीं हुए।<br />लोगों का आक्षेप रहा है कि सप्रे जी योजनाओं को बनाते है, उन्हें कार्यरूप में परिणत करते है लेकिन उनके साथ स्वयं अंत तक नहीं रहते, दूसररों के हाथों मे देते है। उनमें संगठन व्यवस्था की क्षमता न होने के कारण योजनाएँ असफल हो जाती है। चुकिं सप्रे जी आध्यात्मिक वृति के पुरूष थे। वे किसी प्रियसे प्रिय वस्तु या संस्था के साथ आसक्त नहीं हो पाते थे। उनका उद्देश्य यही रहता था कि जनता में से ही योग्य व्यक्तियों के हाथों मे अलिप्तभाव से संस्थाएँ सौंप देनी चाहिए. वे ही धीरे-धीरे उन्हें चलाने की क्षमता प्राप्त कर लेंगें। हर्ष की बात है कि खंड़वा में कर्मवीर-संस्था की जो नींव डाली, वह आज भी जीवित है।   <br />सप्रे जी को उनके अनुवाद के साथ समालोचक के रूप में छतीसगढ मित्र के माध्यम से पंडित माधवराव सप्रे ने हिंदी साहित्य मे समालोचना के प्रतिष्ठित करने का महत्वपूर्ण कार्य किया है। विशेषकर याद किया जाता है उस समय की किसी किताब पर अगर पं. माधवराव सप्रे का समालोचना हो गया हो तो उस किताब व उसके लेखक को वो सारी अच्छाई व उसमें निहित कमियों का जो ब्यौरा उपलब्ध होता था वह आगे के लेखन का एक सुंदर आधार बनता था।       <br />समसामयिक सामाजिक-सांस्कृतिक विषयों पर सप्रे जी के लगभग 200 निबंध अनेक पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए। 1924 में देहरादून में आयोजित अखिल भारतीय हिंदी साहित्य सम्मेलन में वे अध्यक्ष चुने गए। </p>
<h3><span style="color:rgb(186,55,42);"><em><strong>मुख्य कृतियाँ</strong></em></span></h3>
<p>स्वदेशी आंदोलन और बॉयकाट , यूरोप के इतिहास से सीकने योग्य बातें, हमारे सामाजिक हास के कुछ कारणों का का विचार , माधवराव सप्रे की कहानियाँ (संपादनःदेवी प्रसाद वर्मा)<br />अनुवाद- हिदी दासबोध (समर्थ रामदास की मराठी में लिखी गई प्रसिध्दि), गीता रहस्य (बालगंगाधर तिलक), श्रीमन महाभारत मीमांसा का अनुवाद हिंदी मे महाभारत मीमांसाके नाम से किया ( महाभारत के पसंहारः चिंताममी विनायक वैद्य व्दारा मराठी में लिखी गई प्रसिध्द पुस्तक)<br />संपादन- हिंदी केसरी-1907 (साप्ताहिक समाच्र पत्र), छतीसगढ़ मित्र-1900 ( मासिक पत्रिका), हिंदी ग्रंथमाला (1906) <br />इनके योगदान की जितनी भी प्रशंसा की जाए कम ही होगी, 1902 में उन्होंने नागरी प्रचारणी सभा, काशी के ‘विज्ञान शब्दकोश’ योजना को मूर्तरूप देने की जिम्मेदारी अपने हाथों में ली। पंड़ित माध्वराव सप्रे ने केवल विज्ञान कोश का संपादन किया , बल्कि अर्थशास्त्र की शब्दावली की खोज कर उन्होंने इसे संरक्षित कर समृध्द भी किया। विज्ञान शब्दकोश को समृध्द कर मंजिल तक पहुंचाने मे उनका अविस्मरणीय योगदान रहा। इस कार्य के लिए कई बार वाराणासी की यात्रा करते रहे। प्रखर संपादक के रूप में लोक प्रहरी व सुधी साहित्यकार के रूप में उनकी भूमिका लोक शिक्षक की है। कोशकार और नुवादक के रूप में हिंदी भाषा को समृध्द किया। माधवराव सप्रे जी कहानीकार भी थे। उन्होंने राष्ट्रीय कार्य के लिए उपयुक्त अनेक प्रतिभाओं को परख कर उनका उन्नयन किया।  <br />साहित्य एवं पत्रकारिता के क्षेत्र में ऐतिहासिक योगदान देने वाले राष्ट्रीय सृजनशीलता को सम्मानित करने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा पंडित माधव राव सप्रे पुरस्कार की स्थापना की गई है। यह पुरस्कार उन लेखकों एवं पत्रकारों को दिया जाता है जो अपनी विशिष्ट सृजनात्मक लेखनी एवं हिंदी भाषा के प्रति समर्पण से राष्ट्र को गौरवान्वित करते हैं।<br />माधवराव सप्रे जी की स्मृति में एक संग्रहालय और शोध संस्थान जो भोपाल मे स्थित है । इसके विषय में यह भी कहा जाता है कि “ भारतीय इतिहास को महसूस करने का रोमांच प्राप्त करना हो तो इस संग्रहालय को एक बार जरूर देखिए। “ इस संग्रहालय में आप देखेगें की किस तरह कड़ी मेहनत और निष्ठा से इसे संजोया गया है। बौद्दिक धरोहर की सैकड़ो शोध प्रबंधों के लिए आधार स्त्रोत सामाग्री यहां उपलब्ध है। यहां देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के 500 से भी अधिक शोधकर्ताओं ने शोध प्रबंध पूरे किए है। इस संग्रहालय ने देश-विदेश के अनेक शोधार्थियों को शोध के लिए कई बार ऐसी दुर्लभ सामग्री उपलब्ध कराई गई है इस तरह इस संग्रहालय का महत्व बहुत ही अधिक है। इस संग्रहालय को देखने का सौभाग्य मुझे 10-11 वर्ष पहले मिला था।  एक यात्रा के सिलसिले मे मैं भोपाल जाने का कार्यख3म रहा। इसके विषय में  में मेरे कुछ अनुभव इसमें हर तरह के पत्र-पत्रिकों का संग्रह है. 19वीं शताब्दी के ब्रिटिश पत्र-पत्रिकाओं का भी उपलब्ध है। इस संग्रहालय में धरोहर को संरक्षित ही नहीं करता वरन् पुरानी पीढी को अनूठे ढंग से याद भी करता है। मुख्य कक्ष मे विभिन्न साहित्यकारो के चि6 लगे हुए है। वरिष्ठ पत्रकारों की स्मृति में अलग अलग कक्ष बनाए गए है। सप्रे संग्रहालय में “राय बहादुर हीरीलाल कक्ष” जहां गजेटियर्स, इनसाइक्लोपीडिया,एनुअल रजिस्टर्स, रिपोर्ट,दुर्लभ ग्रंथ, पुराने रेडियो और ग्रामाफोन आदि संग्रहित है। पत्रकारिता के रंभ से 1920 तक के समाचार पत्र वाला कक्षः ‘रामेश्वर गूरू’ के नाम से है। माखनलाल चतुर्वेदी कक्ष-ग्रंथालय को नाम दिया गया, यहा 30हजार से भी अधिक ग्रंथ है। जगदीशप्रसाद चतुर्वेदी-माइक्रोफिल्मिंग और क्मप्यूटर तथा बनारसीदास चतुर्वेदी के नाम सीहित्यकारो –पत्रकारों सहित समाज के विभिन्न क्षेत्रों मे कार्यरत व्यक्तियों के पत्राचार को देखा जा सकता है। देश के विभिन्न विश्वविदयालयों से 500 से भी अधिक इस ग्रंथालय के सहयोग से शेद कार्य किए। यह सब उस काल के इतिहास का प्रमामिक दस्तावेज है। कुछ दाहरम इस ग्रंथालय की उपयोगिता को लेकर इस प्रकार है। सर्वप्रथम जापान की शोधकर्ता “”हिसाए कोमात्सु”’ जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय(दिल्ली)’स्त्री अस्मिता की खोज-हिंदी क्षेत्र में स्त्री व्दारा स्त्री विमर्श’ विषय पर शोध कर रही है। इस सिलसिले में उन्हें 1857 से 1947 के बीच प्रकाशित होने वाली पत्र-पत्रिकाओं की तलाश थी जो महिला पर केन्द्रित हो। यह कहीं भी नहीं मिल पा रही थी। इस संग्रहालय मे जब ये उपलब्ध हुआ तो आँखों से खुशी से आंसू निकल पड़े। इसी प्रकार जर्मनी के ‘मारिस हेल्डन’ और उनकी पत्नी जो बर्लिन विश्वविद्यालय में दक्षिण एशिया के विवाह कानूनों पर शोध कर रहे थे इस संग्रहलाय में उन्हें अपने काम की दुर्लभ सामग्री पाकर अभिभूत थे। कुछ यहां पर ऐसा एक प्रसंग भी बहुत याद किया जाता है वेश्याओं के चरित्र पर आधारित एक पुस्तक “नाम चाहिए एक बाप का” के लेखक  ‘बीरेन गोहिल’ जी के साथ ,उनके कुछ लेश संड़े मेल में प्रकाशित हे थे जो संयोग से नके पास उपलब्ध न होने के कारम न्होंने कई सहरो के पुस्तकालयों से प्राप्त करने का प्रयास किया परंतु यह सब उन्हें इस संग्रहालय में मिला। इस संग्रहालय के विषय में डॉ,मंगला अनूजा के नुसार सप्रे संग्रहालय बौध्दिक धरोहर को सहेजने मे पूरी निष्ठा रखती है। इस तरह की प्राप्त समाग्री को उनके प्रदायकर्ता के नाम से ही संरक्षित करता है। वे विश्वसपूर्वक कहती है कि यदि बुजूर्ग पीढी अपनी बौध्दिक विरासत को भावी पीढी के लिए संजोना चाहती है तो वह सप्रे संग्रहालय पर भरोसा कर सकते है।<br />उनका कृतित्व बहुआयामी है। अवदान असाधारण और कालजयी है। पत्रकारिता, साहित्य-सृजन,राष्ट्रभाषा हिंदी का उन्नयन, जन जागृति, स्वाधिनता आंदोलन, शिक्षा-संस्कार, नई पीढी की दीक्षा इत्यादि विविध क्षेत्रों में सप्रे जी ने आधारभूत कार्य किर्य किय़े है। आज का समय 1871 से 2025 करीब 155वें वर्ष का समय उनके कृतित्व के पुनर्पाठ का सुअवसर है। हम माधवराव सप्रे का महत्व चिरकालिक प्रसंगिकता को अपने अंदर समेटते हुए। नई पीढ़ी के लिए ऐसे अवदान के साथ साहित्य कर्म-पथ को अग्रसर कर गए।           <br />विविधताओं व साहित्यिक संधर्ष ,सामाजिक, पश्चाताप के लिए आध्यात्मिक एकांतवास का जीवन, पत्रकारिकता के छेत्र मे अव्दितीय सफलता अर्जित करते हुए  पंडित माधवराव सप्रे का निधन 23 अप्रैल 1926 को रायपुर के टाटीपारा स्थित उनके निवास पर हुआ। ऐसे महान व्यक्तित्व को हमारी विनम्र श्रध्दांजलि।</p>
<blockquote class="format1"><span style="color:rgb(186,55,42);"><em><strong>लिंगम चिरंजीव राव  </strong></em></span><br /><span style="color:rgb(186,55,42);"><em><strong>संकलन व लेखन</strong></em></span><br /> <img src="https://www.khaskhabar.news/media/2025-06/ling.jpg" alt="ling" width="480" height="770"></img></blockquote>]]></content:encoded>
                
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                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Thu, 19 Jun 2025 14:15:11 +0530</pubDate>
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                <title>पूर्व राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने लिखा केन्द्रीय कोयला मंत्री को पत्र</title>
                                    <description><![CDATA[जिले की कोयला खदान विस्तार परियोजनाओं से प्रभावित भू-विस्थापित परिवारों की पीड़ा से कराया अवगत कोरबा// पूर्व राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने कोरबा जिले में एस.ई.सी.एल. प्रबंधन द्वारा संचालित विभिन्न कोयला खदानों में किए जा रहे उत्खनन कार्य अथवा विस्तार परियोजनाओं के लिए अधिग्रहण हेतु चिन्हित भूमि से प्रभावित होने वाले परिवारों को प्राथमिकता के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.khaskhabar.news/other/former-revenue-minister-jaisingh-aggarwal-wrote-a-letter-to-the-union-coal-minister/article-3819"><img src="https://www.khaskhabar.news/media/400/2025-04/jaisingh-agrawal.jpg" alt=""></a><br /><h3><span style="color:#ff0000;"><em><strong>जिले की कोयला खदान विस्तार परियोजनाओं से प्रभावित भू-विस्थापित परिवारों की पीड़ा से कराया अवगत</strong></em></span></h3>
<p><span style="color:#ff0000;"><em><strong>कोरबा//</strong></em></span><br />
पूर्व राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने कोरबा जिले में एस.ई.सी.एल. प्रबंधन द्वारा संचालित विभिन्न कोयला खदानों में किए जा रहे उत्खनन कार्य अथवा विस्तार परियोजनाओं के लिए अधिग्रहण हेतु चिन्हित भूमि से प्रभावित होने वाले परिवारों को प्राथमिकता के आधार पर उचित मुआवजा, व्यवस्थापन एवं रोजगार प्रदान किए जाने के सम्बंध में केन्द्रीय कोयला मंत्री जी. किशन रेड्डी को पत्र लिखा है। जयसिंह अग्रवाल ने पत्र लिखा है कि विगत दिनों गेवरा विस्तार परियोजना में कोयला मंत्री का आगमन हुआ और कोयला उत्खनन से लेकर डिस्पैच तक की विभिन्न गतिविधियों का जायजा लिया। उत्पादन लक्ष्य हासिल करने की ओर अग्रसर प्रबंधन की तारीफ भी मंत्री ने किया और लक्ष्य हासिल करने की दिषा में उत्पन्न हो रहे गतिरोधों को दूर करने अनेक महत्वपूर्ण सुझाव भी उनके द्वारा दिया गया। एस.ई.सी.एल. प्रबंधन के अधिकारियों ने वाहवाही लूटने के लिए केवल उजला पक्ष ही कोयला मंत्री के समक्ष रखा।<br />
जयसिंह अग्रवाल ने पत्र में कोरबा जिला में संचालित विभन्न कोयला खदानों में व्याप्त विसंगतियों की तरफ कोयला मंत्री का ध्यान आकृष्ट करते हुए लिखा है कि गेवरा, दीपका, मानिकपुर कोरबा, कुसमुण्डा अथवा अन्य खदानों के लिए अधिग्रहीत की गई भूमि के मूल किसानों व भू-स्वामियों में से जिन परिवारों को विस्थापित होना पड़ा है, आज तक उन्हें नियमानुसार व्यवस्थापन जैसे उचित मुआवजा, बसाहट हेतु बुनियादी सुविधाएं यथा सड़क, पानी, बिजली, चिकित्सा और बच्चों की शिक्षा के लिए स्कूल आदि के साथ ही योग्य युवाओं को सहयोगी कम्पनियों के जरिए प्राथमिकता के आधार पर यथा योग्य रोजगार उपलब्ध करवाया जाय ताकि उन परिवारों को किसी प्रकार के आंदोलन का सहारा न लेना पड़े। पूर्वमंत्री ने अपने पत्र में यह भी लिखा है कि वास्तव में भू-विस्थापित परिवारों के लोगों को एसईसीएल प्रबंधन ही आंदोलन के लिए मजबूर करता है। हर बार केवल बैठकों के माध्यम से आश्वासन दियाजाता है और फिर कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। वास्तव में पीडि़त परिवार आंदोलन करने मजबूर होते हैं और प्रबंधन से वे कोई भीख नही ंमांगते हैं अपितु अपने हक की मांग करते हैंं जिनकी जमीन अधिग्रहित कर प्रबंधन कोयला उत्खनन कर लक्ष्य हासिल करता है उनकी समस्याओं का समाधान भी प्रबंधन को ही करना होगा। प्रबंधन की गैर जिम्मेदाराना कार्यषैली की वजह से ही भू-विस्थापित परिवारों को अनेक विसंगतियों का खामियाजा भुगतना पड़ता है।<br />
जयसिंह अग्रवाल ने पत्र में कोयला मंत्री से आग्रह किया है कि वे व्यक्तिगत रूचि लेकर मानवीय संवेदना के तहत एक निर्धारित समय सीमा में विस्थापित हुए परिवारों की समस्याओं का समाधान करने हेतु संबंधित अधिकारियों को निर्देशित करें। पत्र में आगे यह भी लिखा गया है कि गेवरा, मानिकपुर कोरबा, कुसमुण्डा अथवा दीपका सहित कोरबा जिले की कोयला खदानों में विस्तार कार्यक्रम के तहत अधिग्रहित की जाने वाली भूमि से प्रभावित होने वाले परिवारों को नियमानुसार समुचित व्यवस्थापन चरणबद्ध तरीके से यदि पहले ही कर दिया जाता है तो अंचल में एक सौहाद्र्रपूर्ण औद्योगिक वातावरण बना रहेगा और भविश्य में पीडि़त परिवारों को किसी आंदोलन हेतु विवष नहीं होना पड़ेगा।<br />
कोयला मंत्री को लिखे गए पत्र में आगे यह भी लिखा गया है कि कोयला खदानों में अपना पसीना बहाकर प्रबंधन के उत्पादन लक्ष्य को हासिल करने हेतु जी तोड़ मेहनत करने वाले खदान मजदूरों की कॉलोनियों में बुनियादी सुविधाओं का नितांत अभाव है। वे सभी मजदूर परिवार कीड़े मकोड़ों जैसी जिन्दगी जीने को मजबूर हैं। मकान क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, चारों तरफ कचरे के अंबार दिखाई पड़ते हैं, सड़कों की स्थिति ऐसी है कि पैदल चलना भी मुश्किल है, गर्मी का मौसम अभी शुरू ही हो रहा है लेकिन पानी का संकट गहराने लगा है। उन खदानकर्मियों को प्रबंधन द्वारा बुनियादी सुविधाए ंभी प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराए जाने हेतु निर्देशित किए जाने का आग्रह किया गया है, क्योंकि कोयला मंत्रालय को देषभर में संचालित कोयला खदानों के जरिए प्राप्त होने वाले कुल राजस्व में से सर्वाधिक राजस्व कोरबा जिला से ही प्राप्त होता है, अतएव एसईसीएल के पास धन की समस्या होने का प्रश्न ही नहीं उठता।</p>
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                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>विचार/ लेख</category>
                                            <category>अन्य</category>
                                            <category>खबर विशेष</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़ विशेष</category>
                                            <category>ब्रेकिंग</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>जरा हटके</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 15 Apr 2025 23:06:32 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>छात्र वही नहीं जो किताबों में डूबा हो, बल्कि वह है जो अपने अनुभवों से सच्चाई को समझे और दुनिया से कुछ नया सीखे &amp;#8211; डॉ. संजय गुप्ता</title>
                                    <description><![CDATA[आज की मेहनत, कल की सफलता बनती है हर दिन एक कदम और बढ़ाओ – शिक्षाविद  डॉ. संजय गुप्ता जो खुद पर विश्वास करता है, वही दुनिया को बदल सकता है – डॉ. संजय गुप्ता आज दिन-प्रतिदिन बढ़ती प्रतिस्पर्धा एवं तनाव भरी जिंदगी में विद्यार्थियों को मानसिक रूप से स्वस्थ व प्रसन्न रहना अतिआवश्यक है […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.khaskhabar.news/other/the-student-is-not-the-one-who-is-immersed-in-books-but-is-the-one-who-understands-the-truth-from-his-experiences-and-learn-something-new-from-the-world/article-3786"><img src="https://www.khaskhabar.news/media/400/2025-03/whatsapp-image-2025-03-09-at-10.07.222.jpeg" alt=""></a><br /><h3><span style="color:#0000ff;"><em><strong>आज की मेहनत, कल की सफलता बनती है हर दिन एक कदम और बढ़ाओ – शिक्षाविद  डॉ. संजय गुप्ता</strong></em></span></h3>
<h3><span style="color:#008000;"><em><strong>जो खुद पर विश्वास करता है, वही दुनिया को बदल सकता है – डॉ. संजय गुप्ता</strong></em></span></h3>
<p>आज दिन-प्रतिदिन बढ़ती प्रतिस्पर्धा एवं तनाव भरी जिंदगी में विद्यार्थियों को मानसिक रूप से स्वस्थ व प्रसन्न रहना अतिआवश्यक है । लेकिन जैसे-जैसे परीक्षा नजदीक आती है विद्यार्थियों में मानसिक दबाव बढ़ते जाता है । वर्षभर नियमित व अनुशासित तथा समर्पित होकर भी हम परीक्षा की तैयारी करें तो भी परीक्षा के दिनों में हम पर मानसिक दबाव व तनाव अवश्य होता है । विद्यार्थियों के मन में विभिन्न प्रकार के प्रश्न उठने लगते हैं और वे सबसे ज्यादा अपने भविष्य के प्रति चिंतित होते हैं। ऐसे ही कुछ महत्वपूर्ण सवालों के जवाब प्रति सप्ताह <span style="color:#ff0000;"><strong>खासखबर.न्यूज़</strong> </span> में देंगें क्षेत्र के ख्यातिलब्ध शिक्षाविद डॉ. संजय गुप्ता<br />
<em><strong><span style="color:#ff0000;">1 – लोकतंत्र में वोट का क्या और कितना महत्व है? अभी युवा होती पीढ़ियों को इसका महत्व कैसे समझाया जाए?</span></strong></em><br />
<span style="color:#339966;"><em><strong>अभिनव देवांगन, दीपका</strong></em></span><br />
<strong><span style="color:#0000ff;">डॉ संजय गुप्ता: –</span></strong> एक अच्छे लोकतंत्र की स्थापना के लिए एक स्वस्थ मतदान का होना अति आवश्यक है। हमें यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि हमारा प्रत्येक वोट बहुमूल्य होता है ।बहुत कीमती होता है। हमें कभी भी अपने वोट को किसी प्रलोभन में आकर नहीं बेचना चाहिए ।आज की युवा पीढ़ी को यह बात अवश्य समझना चाहिए कि यदि वह एक अच्छी शिक्षा, अच्छा रोजगार, एक अच्छा राष्ट्र ,समृद्ध और विकसित भारत देखना चाहते हैं ,तो अपने वोट के महत्व को समझें और किसी अच्छे ईमानदार दल को ही अपना वोट दें ।अपने मताधिकार का अवश्य प्रयोग करें ।लोकतंत्र के इस महान उत्सव में स्वयं को सम्मिलित कर अपने वोट को देकर अपना फर्ज अवश्य अदा करें ।वोट अवश्य दें ,मतदान अवश्य करें।<br />
<span style="color:#ff0000;"><em><strong>2 – किसी भी संस्था में यदि कर्मचारियों में आपसी मतभेद है तो उसे संस्था प्रमुख को क्या करना चाहिए? और उसे संस्था पर क्या प्रभाव पड़ता है?  </strong></em></span><span style="color:#339966;"><em><strong>रीना श्रीवास, बिलासपुर</strong></em></span><br />
<span style="color:#0000ff;"><em><strong>डॉ संजय गुप्ता: –</strong></em></span> किसी भी संस्था में यदि कर्मचारियों में आपसी मतभेद है तो वह उस संस्था की उन्नति में हमेशा अवरोध उत्पन्न करेगा क्योंकि कर्मचारियों की आपसी मतभेद के कारण हम किसी भी काम में गुणवत्ता नहीं दे पाएंगे। हम अपनी एक अलग पहचान नहीं बना पाएंगे। तो सर्वप्रथम तो उस संस्था के प्रमुख को इसके कारणों को जानकर उसे दूर कर ने का प्रयास करना चाहिए ।और कर्मचारियों को समझाना चाहिए कि हम एक अच्छे संबंध बनाकर, अच्छे सामंजस्य के साथ इस संस्था के लिए समर्पित होकर कार्य करें। संस्था प्रमुख को इसके जड़ तक पहुंच कर आपसी मतभेद को अवश्य दूर करना चाहिए। किसी भी संस्था में कोई एक व्यक्ति ऐसा होता है जो संस्था के अन्य कर्मचारियों को दिग्भ्रमित करता है ,भड़कता है ।ऐसे नासूर को उखाड़ कर फेंकना ही संस्था के हित में होता है।<br />
<em><span style="color:#ff0000;"><strong>3 – किसी भी संस्था से यदि अच्छे व काबिल टैलेंटेड व्यक्ति स्विच करते हैं या उस संस्था में अक्सर अच्छे टैलेंट का पलायन हो जाता है तो इसके क्या कारण हो सकते हैं? </strong></span></em><span style="color:#339966;"><em><strong>आकृति मेहरा, भिलाई</strong></em></span><br />
<span style="color:#0000ff;"><em><strong>डॉ संजय गुप्ता: –</strong></em></span> यदि किसी संस्था से अच्छे व काबिल प्रतिभा का पलायन होता है तो यह बहुत सोचनीय विषय है। हमें तत्काल इसके कारणों को जानने का प्रयास करना चाहिए। एक अच्छी प्रतिभा के पलायन के वैसे कई कारण हो सकते हैं। जैसे – उस प्रतिभा को उसे संस्था से संतुष्टिप्रद सुविधा नहीं मिलती हो।वह अपने पर्सनल व प्रोफेशनल लाइफ में संस्था के कार्य दबाव के कारण सामंजस्य या संतुलन स्थापित नहीं कर पाता हो ,उस संस्था में कोई ऐसा व्यक्ति हो जो उसे मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताड़ित करता हो ,इत्यादि कई कारण हो सकते हैं ।या उस व्यक्ति को उस संस्था से भी कोई अच्छा अवसर मिल जाता हो ।अधिकांश संस्था में यदि वरिष्ठ व सीनियर प्रतिभा पलायन करते हैं तो यह उस संस्था के नीव के हिलने के समान होता है। पुरानी प्रतिभाओं को पुराने कर्मचारियों को हमें बहुत ही सम्मान के साथ सहेज कर रखना चाहिए ।साथ ही उनके सुख सुविधाओं व पारिवारिक समस्याओं को भी हमें समझने का प्रयास करना चाहिए ।आखिर वह हमारे परिवार के सदस्य की तरह होते हैं। उन्हें को देखकर अन्य प्रतिभाएं प्रभावित होकर हमें हमारी संस्था को ज्वाइन करते हैं ।और यह बहुत बड़ा उदाहरण बनता है ।पुरानी प्रतिभाओं का हमें हमेशा सम्मान करना चाहिए तभी नई प्रतिभा हमारे संस्था में कार्य करने को उत्सुक रहेंगे और हमारी संस्था निरंतर उन्नति को प्राप्त करेगी।<br />
<em><strong><span style="color:#ff0000;">4 -विद्यार्थियों को पुस्तकीय ज्ञान के अलावा बाह्य ज्ञान देने हेतु स्कूल को क्या प्रयास करना चाहिए ?इससे विद्यार्थियों को क्या लाभ होते हैं? </span></strong></em><span style="color:#339966;"><em><strong>रोहिणी प्रजापति दीपका</strong></em></span><br />
<em><strong><span style="color:#0000ff;">डॉ संजय गुप्ता: –</span></strong></em> विद्यालय को चाहिए कि विद्यार्थियों को न सिर्फ कक्षा में विभाजित विभिन्न कालखंडों में केवल पुस्तकीय ज्ञान दें अपितु पुस्तकों में पढ़ने वाले ज्ञान को जिंदगी में उतारने हेतु प्रायोगिक ज्ञान पर भी बल दें ।समय पर उन्हें विभिन्न स्थानों का भ्रमण कराएं। आसपास स्थित उद्योग ,बैंक, म्यूजियम, पर्यटन स्थल ,अस्पताल, अच्छे शिक्षण संस्थान, गांव के मध्य लगने वाले हाट या बाजार इत्यादि का भ्रमण करा कर हम उनके ज्ञान को और संपुष्ट कर सकते हैं ।हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि विद्यार्थी पढ़े हुए ज्ञान से ज्यादा सीखे हुए ज्ञान को अमल करता है। जो उसको जिंदगी भर याद रहता है।<br />
<span style="color:#ff0000;"><em><strong>5 – क्या विद्यार्थियों को अधिकांश समय अपने पेरेंट्स के साथ व्यतीत करना चाहिए? इससे उन्हें क्या फायदे होते हो सकते हैं? इसके क्या सकारात्मक प्रभाव हमें देखने को मिलेंगे? </strong></em></span><span style="color:#339966;"><em><strong>कल्याण सिंह(राज आरमोर) बुंदेली</strong></em></span><br />
<span style="color:#0000ff;"><em><strong>डॉ संजय गुप्ता: –</strong></em></span> यह हमें कभी नहीं भूलना चाहिए कि हमारी जिंदगी में सर्वप्रथम गुरु हमारे माता-पिता ही होते हैं। हमें उनके एहसानों को जिंदगी भर नहीं भूलना चाहिए। हमें अधिकांश समय अपने माता-पिता के मध्य ही गुजारना चाहिए। आज के इस तकनीकी दुनिया में शायद हम अपने परिवार से दूर होते जा रहे हैं। हमारी दुनिया मोबाइल के 4 इंच के स्क्रीन में ही सिमट कर रह गई है। जबकि माता-पिता के सानिध्य में हमें बहुत कुछ सीखने को मिलता है। यदि हमें जिंदगी में सफलता प्राप्त करनी है, सद्मार्ग में चलना है ,तो माता-पिता की छत्रछाया से हमें कभी दूर नहीं होना चाहिए ।हम उनसे दूर भी रहते हैं तो माता-पिता का आशीर्वाद साए की तरह हमारे पास रहता ही है। यदि हम संस्कार व अनुशासन के पथ पर चलना चाहते हैं, तो माता-पिता का सानिध्य हमें अवश्य प्राप्त करना चाहिए ।हमें माता-पिता के साथ या उनके पास बैठकर अधिकांश समय व्यतीत करना चाहिए। अपनी समस्याओं को, अपनी व्यथाओं को, अपनी शंकाओं को अपनी आशंकाओं को माता-पिता के समक्ष हमें अवश्य व्यक्त करना चाहिए ।क्योंकि वही हमारे जीवन के प्रथम गुरु ,वही हमारे जीवन के प्रथम मित्र होते हैं ।वह हमारे लिए धरती में जीवित और साक्षात ईश्वर होते हैं। हमें अपने माता-पिता में ईश्वर का दर्शन पल प्रतिपल करना चाहिए। भला एक प्राणी ईश्वर से कैसे दूर हो सकता है।</p>
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                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
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                                            <category>विचार/ लेख</category>
                                            <category>अन्य</category>
                                            <category>खबर विशेष</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़ विशेष</category>
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                                            <category>शिक्षा एंव रोजगार</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 30 Mar 2025 20:17:59 +0530</pubDate>
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                <title>चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 30 मार्च से, जानें क्या है घटस्थापना का शुभ मुहूर्त और नियम</title>
                                    <description><![CDATA[नवरात्रि की नवमी तिथि 7 अप्रैल को हिंदू धर्म में नवरात्रि को बहुत ही खास माना जाता है। नवरात्रि का व्रत साल में चार बार रखा जाता है, जिसमें से दो बार प्रत्यक्ष और दो बार गुप्त नवरात्रि आती हैं। शारदीय और चैत्र नवरात्रि को छोड़कर दो गुप्त नवरात्रि भी होती हैं। वहीं चैत्र नवरात्रि […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.khaskhabar.news/other/learn-the-beginning-of-chaitra-navratri-from-march-30-what-is-the-auspicious-time-and-rules-of-ghatasthapana/article-3780"><img src="https://www.khaskhabar.news/media/400/2025-03/55-1.jpg" alt=""></a><br /><h3><span style="color:#ff0000;"><em><strong>नवरात्रि की नवमी तिथि 7 अप्रैल को</strong></em></span></h3>
<p>हिंदू धर्म में नवरात्रि को बहुत ही खास माना जाता है। नवरात्रि का व्रत साल में चार बार रखा जाता है, जिसमें से दो बार प्रत्यक्ष और दो बार गुप्त नवरात्रि आती हैं। शारदीय और चैत्र नवरात्रि को छोड़कर दो गुप्त नवरात्रि भी होती हैं। वहीं चैत्र नवरात्रि चैत्र महीने में पड़ती है। इसकी शुरुआत चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से होती है और नवमी तिथि पर समापन होता है। वहीं इस साल चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 30 मार्च से शुरू हो रही है। इस दिन मां दुर्गा के नौ स्वरुपों की पूजा की जाती है। जिसमें नवरात्रि की नवमी तिथि 7 अप्रैल 2025 को है।<br />
हीं बता दें कि, 14 मार्च से खरमास की शुरुआत हो चुकी है जो आने वाले 13 अप्रैल को खत्म होगा। इस दौरान शुभ कार्यों पर प्रतिबंध लग जाता है। वहीं इस बार चैत्र नवरात्र में खरमास की अशुभ छाया रहने वाली है। सभी धार्मिक कार्य किए जा सकते हैं, जैसे- पूजा पाठ, जप-तप और ईश्वर का स्मरण आदि। तो चलिए जानते हैं।घटस्थापना का शुभ मुहूर्त क्या होगा।<br />
इस साल चैत्र नवरात्रि के दिन कलश स्थापना के लिए 2 शुभ मुहूर्त प्राप्त हो रहे हैं। एक मुहूर्त सुबह में और दूसरा मुहूर्त दोपहर में है। सुबह में कलश स्थापना का मुहूर्त 6 बजकर 13 मिनट से सुबह 10 बजकर 22 मिनट तक है। दोपहर में घटस्थापना का शुभ समय 12 बजकर 01 मिनट से 12 बजकर 50 मिनट तक है।</p>
<h3><span style="color:#ff0000;"><em><strong>घटस्थापना</strong></em></span></h3>
<p>घटस्थापना हमेशा शुभ मुहूर्त पर ही करना चाहिए। इसलिए मुहूर्त का खास ध्यान रखें।<br />
उत्तर-पूर्व दिशा यानी ईशान कोण में ही हमेश कलश की स्थापना करें।<br />
जहां घटस्थापना करनी हो उस जगह की अच्छे से साफ-सफाई कर लें और फिर गंगाजल छिड़कर उस जगह को पवित्र कर लें।<br />
पूजा की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और उसपर अक्षत से अष्टदल बनाकर मां दुर्गा की तस्वीर स्थापित करें।<br />
अब इसके बाद कलश में पानी, गंगाजल, सिक्का, रोली, हल्दी गांठ, दुर्वा, सुपारी डालें।<br />
कलश में 5 आम के पत्ते रखकर उसे ढक दें और ऊपर से नारियल रख दें।<br />
इसके बाद एक मिट्टी के बर्तन में साफ मिट्टी रखें और उसमें कुछ जौ के दानें बो दें और ऊपर से पानी का छिड़काव करें। फिर इसे चौकी पर स्थापित कर दें।<br />
फिर दीप जलाकर गणपति बप्पा, माता जी और नवग्रहों का आव्हान करें। फिर विधिवत देवी का पूजन करें।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विचार/ लेख</category>
                                            <category>अन्य</category>
                                            <category>खबर विशेष</category>
                                            <category>ब्रेकिंग</category>
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                                            <category>जरा हटके</category>
                                            <category>धार्मिक / आस्था</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 29 Mar 2025 16:27:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Khaskhabar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2025: &amp;#8216;एमपी में निवेश का यही सही समय- पीएम मोदी</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री ने किया 18 नीतियों का किया लोकार्पण 20 भारतीय यूनिकार्न के संस्थापक भी जीआईएस में हैं शामिल भोपाल// प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भोपाल के इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस) का उद्घाटन किया। कार्यक्रम स्थल पर वे मंच पर नहीं नीचे लगी कुर्सी पर बैठे। इसके पहले पीएम ने प्रदेश […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.khaskhabar.news/other/this-is-the-right-time-to-invest-in-global-investors-summit-2025-mp/article-3562"><img src="https://www.khaskhabar.news/media/400/2025-02/untitled-431.jpg" alt=""></a><br /><h3><em><strong>प्रधानमंत्री ने किया 18 नीतियों का किया लोकार्पण</strong></em></h3>
<h3><em><strong>20 भारतीय यूनिकार्न के संस्थापक भी जीआईएस में हैं शामिल</strong></em></h3>
<p><em><strong>भोपाल//</strong></em><br />
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भोपाल के इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस) का उद्घाटन किया। कार्यक्रम स्थल पर वे मंच पर नहीं नीचे लगी कुर्सी पर बैठे।<br />
इसके पहले पीएम ने प्रदेश में <a href="http://google.com"><em><strong>18 नीतियों का लोकार्पण</strong> </em></a>किया। यह नीतियां प्रदेश में विकास की गति को नई दिशा देंगी। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में निवेश का यही समय सही है। इसके साथ उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में टेक्सटाइल, टूरिज्म और टेक्नोलॉजी सेक्टर नई जॉब्स क्रिएट करेंगे।<br />
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत में कहा कि आज मुझे यहां आने में विलंब हुआ, इसके लिए मैं आप सबसे क्षमा चाहता हूं। विलंब इसलिए हुआ क्योंकि कल जब मैं यहां पहुंचा तो एक बात ध्यान में आई कि आज 10वीं और 12वीं के छात्रों के एग्जाम हैं।</p>
<p><iframe title="Inauguration of Global Investors Summit 2025 by Hon'ble Prime Minister Shri Narendra Modi" width="696" height="392" src="https://www.youtube.com/embed/zvjqRhKEklk?feature=oembed" frameborder="0" allowfullscreen=""></iframe></p>
<p>उसका समय और मेरा<a href="https://www.khaskhabar.news"><em><strong> राजभवन</strong> </em></a>से निकलने का समय क्लेश हो रहा था। उसके कारण संभावना थी कि सिक्युरिटी के कारण अगर रास्ते बंद हो जाएं और बच्चों को परीक्षा के लिए जाने में कठिनाई हो जाए। ये कठिनाई न हो, बच्चे समय से अपने परीक्षा केंद्र पर पहुंच जाएं। इसके कारण मैंने निकलने में ही 10-15 मिनट की देरी कर दी।<br />
विकसित मध्य प्रदेश से विकसित भारत की यात्रा में आज का ये कार्यक्रम बहुत अहम है। इस भव्य आयोजन के लिए मैं सीएम डॉ. मोहन यादव और उनकी पूरी टीम को <a href="https://www.khaskhabar.news/in-the-wedding-pavilion-the-groom-wore-someone-else-to-go-to-varmala-what-happened-then/"><em><strong>बहुत-बहुत बधाई</strong></em></a> देता हूं। भारत के इतिहास में ऐसा अवसर पहली बार आया है, जब पूरी दुनिया भारत के लिए इतनी ऑप्टिमिस्टिक है। पूरी दुनिया में चाहे सामान्य जन हो, अर्थनीति के विशेषज्ञ हो, विभिन्न देश हो या फिर इंस्टीट्यूशन इन सभी को भारत से बहुत आशाएं हैं।<br />
<em><strong>अदाणी समूह एमपी में करेगा 2 लाख 10 हजार करोड़ रुपये का निवेश</strong></em><br />
जीआईएस में उद्योगपति गौतम अदाणी ने घोषणा की है कि वे मध्य प्रदेश में 2 लाख 10 हजार करोड़ रुपये का निवेश करेंगे। 110000 करोड रुपये की घोषणा उन्होंने कुछ विशेष क्षेत्र के लिए की है। बाकी एक लाख करोड रुपये का निवेश वह कुछ सेक्टर में सरकार से चर्चा करने के बाद करेंगे।<br />
<em><strong>पीएम मित्र पार्क सहित मप्र की 11 विशेषताओं का डिजिटल अनुभव</strong></em><br />
ग्लोबल इन्वेस्टर समिट (जीआईएस) में पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी के सपने को साकार करती मध्य प्रदेश की नदी जोड़ो परियोजना, धार का पीएम मित्र पार्क और कूनो में चीतों के कुनबा सहित प्रदेश की 11 विशेषताओं का डिजिटल अनुभव किया जा सकेगा।<br />
<em><strong>नगरीय विकास और प्रवासी महाकुंभ भी</strong></em><br />
जीआईएस में सात विभागीय सम्मेलन होंगे, जिनमें आईटी प्रौद्योगिक, नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा, पर्यरण, खनन, एमएसएमई, स्टार्टअप, नगरीय विकास और प्रवासी महाकुंभ होगा। जीआईएस के लिए 31,659 पंजीयन हुए है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्यप्रदेश</category>
                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>विचार/ लेख</category>
                                            <category>अन्य</category>
                                            <category>खबर विशेष</category>
                                            <category>ब्रेकिंग</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>जरा हटके</category>
                                            <category>व्यापार</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 24 Feb 2025 14:50:59 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>पुरस्कार राशि का उपयोग आदिवासी बच्चों के शिक्षा में करेंगे खर्च</title>
                                    <description><![CDATA[“मुख्यमंत्री शिक्षा गौरव अलंकरण से सम्मानित हुए पाली के शिक्षक संतोष” कोरबा // शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने पर शिक्षक संतोष कर्ष को मुख्यमंत्री शिक्षा अलंकरण शिक्षा दूत से श्रम एवं उद्योग मंत्री  लखन लाल देवांगन के हाथों सम्मानित किया गया। इस अवसर पर कोरबा कलेक्टर श्री अजीत बसन्त जी जिला शिक्षा अधिकारी […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.khaskhabar.news/other/prize-money-will-be-used-in-education-of-tribal-children/article-3473"><img src="https://www.khaskhabar.news/media/400/2025-02/img_20250203_110956-scaled.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>“मुख्यमंत्री शिक्षा गौरव अलंकरण से सम्मानित हुए पाली के शिक्षक संतोष”</strong></p>
<p><strong>कोरबा //</strong> शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने पर शिक्षक संतोष कर्ष को मुख्यमंत्री शिक्षा अलंकरण शिक्षा दूत से श्रम एवं उद्योग मंत्री  लखन लाल देवांगन के हाथों सम्मानित किया गया। इस अवसर पर कोरबा कलेक्टर श्री अजीत बसन्त जी जिला शिक्षा अधिकारी श्री टीपी उपाध्याय जी मुख्य कार्य पर अधिकारी श्री दिनेश नाग जी की उपस्थिति में यह कार्यक्रम संपन्न हुआ। आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र शासकीय प्राथमिक शाला कारीछापर विकासखंड पाली में पदस्थ शिक्षक संतोष कर्ष पदभार ग्रहण करते ही शिक्षा के क्षेत्र में बच्चों के लिए च समुदाय के सहयोग से आवश्यक सामग्री जुटाते रहते हैं वे शिक्षा के साथ-साथ समाज की सेवा भी करते हैं अभी तक उन्होंने स्कूल के बच्चों के लिए समुदाय के सहयोग से एलईडी वाटर फिल्टर स्कूली बैग सभी बच्चों के लिए जूते मौसम अनुकूल कपड़े आदि एकत्रित करते रहते हैं शिक्षक संतोष कर्ष नवाचारी शिक्षक भी हैं उनके नवाचार को अन्य शिक्षकों द्वारा बहुत पसंद किया जाता है कबाड़ जुगाड़ प्रतियोगिता में भी वह ब्लॉक एवं जिला स्तर पर अपना परचम फर चुके हैं वे दिव्यांगों की मदद भी करते हैं और उनके लिए सहायता राशि जुटाते हैं शिक्षा के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें सीसीआरटी दिल्ली उदयपुर में भी विभिन्न प्रशिक्षण हेतु आमंत्रित किया गया था वे अपने जिले में एफएलएन के जिला स्तर और राज्य स्तर के मास्टर ट्रेनर् भी है उनके स्कूल से दो बच्चों का चयन एकलव्य आवासीय विद्यालय के लिए भी हुआ है आदिवासी बालक सूर्य प्रकाश नेटी का चयन गुरुकुल पेंड्रा के लिए हुआ है मुख्यमंत्री गौरव अलंकरण मिलने से विकासखंड शिक्षा अधिकारी श्री श्यामानंद साहू जी ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षक संतोष कर्ष बच्चों के लिए समय-समय पर कुछ ना कुछ नवाचार करते रहते हैं उनके इस कार्य से अन्य शिक्षक भी उत्साहित होकर आगे आते हैं। बीआरसी श्री राम गोपाल जयसवाल जी ने कहा कि शिक्षक संतोष कर्ष ने शिक्षा के क्षेत्र में पाली ब्लॉक का नाम रोशन किया है शिक्षक संतोष कर्ष ने कहा कि इस अलंकरण से मिली हुई कुछ राशि वे आदिवासी बच्चों की शिक्षा के क्षेत्र में खर्च करेंगे।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>विचार/ लेख</category>
                                            <category>अन्य</category>
                                            <category>खबर विशेष</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़ विशेष</category>
                                            <category>ब्रेकिंग</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>जरा हटके</category>
                                            <category>शिक्षा एंव रोजगार</category>
                                    

                <link>https://www.khaskhabar.news/other/prize-money-will-be-used-in-education-of-tribal-children/article-3473</link>
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                <pubDate>Mon, 03 Feb 2025 11:27:03 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>प्रतिक्रिया : केंद्रीय बजट में आम जनता हुए उपेक्षित</title>
                                    <description><![CDATA[जांजगीर चांपा// केंद्रीय बजट में आम जनता को पूरी तरह से उपेक्षित किया गया है। महंगाई,बेरोजगारी,जैसे समस्याओं का निराकरण का कोई भी झलक बजट में नहीं है। बजट पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए राजमिस्त्री मजदूर रेजा कुली एकता यूनियन के राज्य कार्यकारी अध्यक्ष सुखरंजन नंदी एवं उपाध्यक्ष बजरंग पटेल ने बताया कि देश में मेहनतकश […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.khaskhabar.news/news-special/reaction-is-neglected-in-the-union-budget/article-3462"><img src="https://www.khaskhabar.news/media/400/2025-02/images-2.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>जांजगीर चांपा//</strong></p>
<p>केंद्रीय बजट में आम जनता को पूरी तरह से उपेक्षित किया गया है। महंगाई,बेरोजगारी,जैसे समस्याओं का निराकरण का कोई भी झलक बजट में नहीं है।<br />
बजट पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए राजमिस्त्री मजदूर रेजा कुली एकता यूनियन के राज्य कार्यकारी अध्यक्ष सुखरंजन नंदी एवं उपाध्यक्ष बजरंग पटेल ने बताया कि देश में मेहनतकश लोगों की क्रयशक्ति में हो रही गिरावट के कारण देश के अंदरूनी बाजार संकुचित हो रहा है और उत्पादित वस्तु के बाजार में खरीददार नहीं है। इस मुख्य आर्थिक संकट से देश को बाहर निकालने के लिए देश में मेहनतकश लोगों की उपार्जन के श्रोत का बढ़ाने के लिए रोजगार सृजन की आवश्यकता को बजट में पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया है।<br />
नेताओं ने कहा कि एक तरफ आम जनता की क्रयशक्ति घट रही है और दूसरी तरफ भयानक महंगाई आम जनता पर अधिक आर्थिक बोझ डाल रही है।केंद्रीय वित्तमंत्री द्वारा पेश बजट में महंगाई की विभीषिका के निजाद दिलाने का कोई दिशा नहीं है।बल्कि इस बार के बजट में खाद्य सब्सिडी में पिछले वर्ष के अपेक्षा कम राशि आवंटित किया गया है।<br />
यूनियन के नेताओं ने कहा कि एक तरफ रोजगार की संकट के चलते देश के बहुमत जनता की आय में कमी हो रही है जनता के आय को बढ़ाए बिना वित्त मंत्री बड़े लोगों की आयकर में राहत देकर लोगों की भ्रमित कर रही है।क्योंकि इस छूट से माध्यम वर्ग से अधिक धनाढ्य और उच्च वर्ग ही अधिक लाभान्वित होंगे। कॉरपोरेट कर और धनाढ्य वर्ग पर कर की मात्रा बढ़ाने के अवसर था लेकिन वित्तमंत्री ने उस दिशा में कोई भी कदम नहीं उठाया है। कॉरपोरेट घरानों से अधिक टैक्स लगाकर सरकार अपनी राजस्व में वृद्धि कर खाद्य अनुदान ,शिक्षा,स्वास्थ्य,और अन्य सामाजिक क्षेत्र में आबंटित राशि में वृद्धि कर सकती थी क्यों कि शिक्षा,स्वास्थ,खाद्य अनुदान में किया गया आबंटित राशि अपर्याप्त है। पिछले वर्ष खाद्य अनुदान जहां 2.05 लाख करोड़ रुपए आवंटित किया गया था इस वर्ष इस मद पर आबंटित राशि में कटौती कर 2.03 लाख करोड़ रुपए किया गया है।ग्रामीण जनता के रोजगार का एक प्रमुख स्रोत मनरेगा है और मनरेगा में रोजगार की मांगे बढ़ी है लेकिन इस मद पर आबंटन में कोई बढ़ोतरी नहीं किया गया है। उसका सीधा मतलब है कि इस क्षेत्र में कम लोगों को कम दिनों के लिए ही रोजगार मिलेगी।यानी मनरेगा में मजदूरों की कार्यदिवस में कटौती किया गया।<br />
नेताओं ने बिना क्षेत्र में 100 प्रतिशत विदेशी निवेश का विरोध किया है।</p>
<p><strong>बजरंग पटेल </strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>विचार/ लेख</category>
                                            <category>खबर विशेष</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़ विशेष</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>जरा हटके</category>
                                            <category>व्यापार</category>
                                    

                <link>https://www.khaskhabar.news/news-special/reaction-is-neglected-in-the-union-budget/article-3462</link>
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                <pubDate>Sun, 02 Feb 2025 13:08:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Khaskhabar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दिन विशेष : मुश्किलों से जीत कर ही हमें अपनी क्षमता का ज्ञान होता है &amp;#8211; ख्यातिलब्ध शिक्षाविद डॉ. संजय गुप्ता</title>
                                    <description><![CDATA[कम अंक हमें हताश होने के लिए नहीं बल्कि भविष्य में बेहतर करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं -डॉ. संजय गुप्ता एक प्रश्न पूछना और उस प्रश्न का उत्तर ढूंढ़ने की कोशिश करना एक विद्यार्थी की खासियत है- ख्यातिलब्ध शिक्षाविद डॉ. संजय गुप्ता परीक्षा इसलिए नही ली जाती की आप उसमें में कितने अंक प्राप्त […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.khaskhabar.news/other/it-is-only-by-overcoming-special-difficulties-that-day-that-we-become-aware-of-our-potential-renowned-educationist-dr-sanjay-gupta/article-3359"><img src="https://www.khaskhabar.news/media/400/2025-01/whatsapp-image-2024-12-10-at-09.10.44.jpeg" alt=""></a><br /><h3><em><strong> कम अंक हमें हताश होने के लिए नहीं बल्कि भविष्य में बेहतर करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं -डॉ. संजय गुप्ता</strong></em></h3>
<h3><strong>एक प्रश्न पूछना और उस प्रश्न का उत्तर ढूंढ़ने की कोशिश करना एक विद्यार्थी की खासियत है- ख्यातिलब्ध शिक्षाविद डॉ. संजय गुप्ता</strong></h3>
<h3><em><strong>परीक्षा इसलिए नही ली जाती की आप उसमें में कितने अंक प्राप्त करते हैं बल्कि इसलिए ली जाती है कि आप उस मुमकिन कार्य को करने में कितने सक्षम है या फिर आपकी काबिलियत क्या है -डॉ. संजय गुप्ता</strong></em></h3>
<p style="text-align:left;"><em><strong>दीपका – कोरबा //</strong></em><br />
<em>आज दिन-प्रतिदिन बढ़ती प्रतिस्पर्धा एवं तनाव भरी जिंदगी में विद्यार्थियों को मानसिक रूप से स्वस्थ व प्रसन्न रहना अतिआवश्यक है । लेकिन जैसे-जैसे परीक्षा नजदीक आती है विद्यार्थियों में मानसिक दबाव बढ़ते जाता है । वर्षभर नियमित व अनुशासित तथा समर्पित होकर भी हम परीक्षा की तैयारी करें तो भी परीक्षा के दिनों में हम पर मानसिक दबाव व तनाव अवश्य होता है । विद्यार्थियों के मन में विभिन्न प्रकार के प्रश्न उठने लगते हैं और वे सबसे ज्यादा अपने भविष्य के प्रति चिंतित होते हैं। ऐसे ही कुछ महत्वपूर्ण सवालों के जवाब प्रति सप्ताह खासखबर डॉट न्यूज़ वेब डिजिटल प्लेटफार्म में देंगें क्षेत्र के ख्यातिलब्ध शिक्षाविद डॉ. संजय गुप्ता</em><br />
<em><strong>1 – अभी विद्यार्थियों की बोर्ड परीक्षाएं जारी हैं ।अतः अच्छी सफलता हेतु आप विद्यार्थियों को क्या टिप्स देना चाहेंगे?</strong></em><br />
<em><strong>वैभव साहू,भिलाई नगर</strong></em><br />
<em><strong>डॉ संजय गुप्ता: –</strong></em> खुद पर विश्वास करें कि आप परीक्षा में अच्छी सफलता प्राप्त करने के लिए ही बने हैं। सुपाच्य भोजन करें एवं अपने दैनिक जीवन में ध्यान, एवं योग तथा एक्सरसाइज को अवश्य शामिल करें। इससे रक्त का संचार हमारे दिमाग सहित शरीर के अन्य हिस्सों में सुचारू रूप से बना रहता है एवं हम तरोताजा महसूस करते हैं। पढ़ते समय मध्य में कुछ अंतराल लेकर ध्यान मेडिटेशन अवश्य करें इससे हमारी बुद्धि तीक्ष्ण होती है हमारा ध्यान पढ़ने में लगता है हमारा कंसंट्रेशन पावर स्ट्रॉन्ग होता है। सभी विषयों की अच्छी तैयारी करें शंका की स्थिति में विषय विशेषज्ञों से अवश्य संपर्क करें अपने शिक्षकों से सतत संपर्क में रहे। खुद पर विश्वास करें कि आप सभी प्रश्नों के अच्छे उत्तर लिख सकते हो। घबराएं नहीं। घबराहट को अपने दिलों दिमाग से हमेशा के लिए दूर भगा दें। पूर्व में हो चुके प्री बोर्ड परीक्षाओं के प्रश्न पत्रों का सतत अभ्यास करें। प्रत्येक पाठ को गहराई से समझने का प्रयास करें। ज्यादा से ज्यादा प्रश्नों को स्वयं हल करें।<br />
<em><strong>2 – मेरी बोर्ड परीक्षा अभी जारी है।लेकिन बदकिस्मती से मेरे आस पड़ोस शादी का भी पुरजोर माहौल है। बहुत ज्यादा व्यवधान पढ़ाई में उत्पन्न हो रहा है। मैं अपनी मनःस्थिति को कैसे नियंत्रित करूं। बहुत तनाव में हूं।</strong></em><br />
<em><strong>अमन यादव, एनटीपीसी कॉलोनी</strong></em><br />
<em><strong>डॉ संजय गुप्ता: –</strong> </em>ऐसी स्थिति में आपको चाहिए कि आप स्वयं अपने आस पड़ोस के लोगों से बात करें ।उन्हें समझाएं कि अभी आपके भविष्य का सवाल है और आप जैसे कितने ही बच्चे होंगे जो बोर्ड की परीक्षा में शामिल हो रहे होंगे ।उन्हें समझाएं कि वह ध्वनि विस्तारक यंत्रों का प्रयोग ना करें ।यह कानूनन अपराध है ।उन्हें यह न लगे कि आप उनकी खुशी में खलल डाल रहे हैं ।आप यह भी समझाएं कि यह आपके भविष्य के लिए भी सही नहीं है ।शादी की खुशियों को वह पूरा एंजॉय करें ।लेकिन आपके बारे में भी ख्याल रखें । साउंड्स का प्रयोग अवश्य करें ,लेकिन सीमित आवाज में या निश्चित समय के लिए। आप चाहे तो उनसे बात करके एक निश्चित समय सीमा भी निर्धारित कर सकते हैं। क्योंकि पड़ोस की शादी यानी उस उत्सव में आपको भी प्रत्यक्ष या प्रत्यक्ष रूप से शामिल होना ही है। हमें अपने आस – पड़ोस के लोगों से संबंध भी अच्छे रखे होंगे ।हमें बीच का रास्ता निकालना चाहिए। जिससे सांप भी मर जाए और लाठी भी ना टूटे। हमें किसी से झगड़ा मोल नहीं लेना है ।बस उन्हें समझाने का प्रयास करना है कि साउंड का उपयोग सीमित समय के लिए ही करें, ताकि आपकी पढ़ाई में भी व्यवधान उत्पन्न ना हो ।आप अपनी सुविधा अनुसार भी टाइम को मैनेज कर सकते हैं ।आपका पूरा फोकस आपकी स्टडी होनी चाहिए। तनाव ना लें, तनाव मुक्त होकर पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करें।<br />
<em><strong>3 – विद्यालय में कई बच्चे परीक्षा के समय में भी लगातार अनुपस्थित रहते हैं। बार-बार सूचना देने पर भी विद्यालय आने में कोताही बरतते हैं जिससे परीक्षा में उनका प्रदर्शन अत्यंत दयनीय रहता है ।ऐसे विद्यार्थियों के लिए क्या किया जाए?</strong></em><br />
<em><strong>हरीश सिंह, दीपका</strong></em><br />
<em><strong>डॉ संजय गुप्ता: –</strong></em> ऐसी बात है तो यह बहुत गंभीर स्थिति है। हमें विद्यार्थियों के अभिभावकों से बात कर वस्तु स्थिति से अवगत कराना चाहिए ।अगर विद्यार्थी लगातार विद्यालय में अनुपस्थित हो रहा है तो यह अवश्य है कि उनके अभिभावक भी संजीदा नहीं है। हमें उनके अभिभावकों से बात कर उन्हें समझाने का प्रयास करना चाहिए कि यह विद्यार्थी के भविष्य के लिए सही नहीं है। ऐसी स्थिति में विद्यार्थी में विभिन्न प्रकार के अधिगम विकार हमें देखने को मिलते हैं। जिन्हें डायग्नोसिस कर हमें विद्यार्थी के सतत सुधार की आवश्यकता होती है। ऐसे विद्यार्थियों के अभिभावकों को विद्यालय में बुलाकर हमें अवश्य समझाने का प्रयास करना चाहिए ।इसमें दोष विद्यार्थी का नहीं है 100% अभिभावकों का है।<br />
<em><strong>4 – मेरा बेटा अभी कक्षा नवमी में है, लेकिन मैं कुछ दिनों से देख रहा हूं कि जिस प्रकार वह कक्षा आठवीं तक प्रदर्शन करता था ,नवमी में उसका प्रदर्शन वैसा नहीं रहा ।इसके क्या कारण हो सकते हैं? उसे मैं पुनः उस स्थिति जैसा कैसे बनाऊं?</strong></em><br />
<em><strong>संतोष विश्वकर्मा, गेवरा</strong></em><br />
<em><strong>डॉ संजय गुप्ता: –</strong></em> यदि बच्चा कक्षा नवमी में है तो हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए कि वह अभी किशोरावस्था में पदार्पण कर चुका है ।इस समय विभिन्न प्रकार के मानसिक और शारीरिक परिवर्तन हमें उसमें देखने को अवश्य मिलेंगे। किशोरावस्था तूफान एवं बदलाव की अवस्था होती है ।इस अवस्था में उसे प्यार के साथ-साथ सख्त अनुशासन की भी बहुत आवश्यकता है। आप ध्यान दीजिए कि उसका ध्यान पढ़ाई में नहीं लगकर कहीं और विचलित तो नहीं हो गया है? यह समय ही बहुत ही उथल-पुथल व संघर्ष का रहता है ।हमें बराबर उसकी प्रत्येक एक्टिविटीज पर नजर बनाए रखनी होगी। हमें उसे समझाना होगा कि उसका मुख्य उद्देश्य पढ़ना और कुछ बनना ही है ।वह अपना पूरा ध्यान व पढ़ाई में केंद्रित करें। हमें उसे सतत समझाना होगा । हमें उसकी सुषुप्त शक्तियों को अवश्य जागृत करना होगा। उसे समझाएं कि वह कक्षा आठवीं तक क्या था और अभी उसकी स्थिति क्या हो रही है? उसे एहसास दिलाएं,न कि डांटे।<br />
<em><strong>5 – शिक्षण में क्वालिटी और क्वांटिटी के भेद को स्पष्ट करें।</strong></em><br />
<em><strong>राकेश मनोहर, बिलासपुर </strong></em><br />
<em><strong>डॉ संजय गुप्ता: –</strong></em> आपका प्रश्न अति उत्तम है। मेरा मानना है कि यदि हमारे शिक्षक वा शिक्षण में क्वालिटी है तो क्वांटिटी ऑटोमेटिक ही इंप्रूव हो जाती है। यदि हमारी शिक्षण व्यवस्था या शिक्षा गुणवत्ता से परिपूर्ण है तो हम हमें संख्या बढ़ाने हेतु दर-दर जाने की आवश्यकता नहीं है। हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए कि समय के मांग के अनुरूप हमें स्वयं को और विद्यालय को अवश्य परिवर्तित कर लेना चाहिए। दुनिया में बहुत ज्यादा प्रतिस्पर्धा है ।हमें उस प्रतिस्पर्धा के मुताबिक खुद को भी तैयार करना ही होगा ।अक्सर सुनने में आता है कि ‘ जो दिखता है वह बिकता है’ लेकिन मैं इसके विपरीत सोचता हूं कि शिक्षा कोई बेचने की वस्तु नहीं है ,अगर आपकी शिक्षण में गुणवत्ता है तो वह गुणवत्ता लोगों को विद्यार्थियों के कार्य व्यवहार उसके प्रदर्शन में अवश्य नजर आती है ।तो आपकी मार्केटिंग ,आपका प्रचार प्रसार तो वैसे ही हो जाता है। आप लोगों के दिलों और दिमाग पर राज करते हो ।इसके लिए आपको विभिन्न प्रकार के प्रचार प्रसार करने की आवश्यकता नहीं होती। अल्टीमेटली लोगों को उच्च गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा तो चाहिए ही। इसके लिए क्यों ना हम आज से तैयार रहें ,व कमर कस के मेहनत करें। हम अपनी एक अलग पहचान बनाएं ।यही अंतर है क्वालिटी और क्वांटिटी में ।क्वालिटी है तो क्वांटिटी झक मार के पीछे-पीछे आ ही जाती है।</p>
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                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>विचार/ लेख</category>
                                            <category>अन्य</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़ विशेष</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>जरा हटके</category>
                                            <category>शिक्षा एंव रोजगार</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jan 2025 18:16:03 +0530</pubDate>
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                <title>मुख्यमंत्री के सुशासन में महिलाए  बन रही हैं सशक्त, हो रही हैं आत्मनिर्भर</title>
                                    <description><![CDATA[महिला स्व सहायता समूह से जुड़कर कार्य कर रही है नीतू, बनी लखपति महिला मुद्रा लोन लेकर बढ़ाया अपना किराना का व्यवसाय, अब गांव के लोगों को लोन दिलाने में कर ही है मदद व्यवसाय और खेती से विगत दो माह में कमा चुकी हैं लगभग 2 लाख रुपए से अधिक की राशि जशपुर // […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.khaskhabar.news/other/under-the-good-governance-of-the-chief-minister-women-are-becoming-empowered-and-self-reliant/article-3353"><img src="https://www.khaskhabar.news/media/400/2025-01/untitled-20.jpg" alt=""></a><br /><h3><strong>महिला स्व सहायता समूह से जुड़कर कार्य कर रही है नीतू, बनी लखपति महिला</strong></h3>
<h3><strong>मुद्रा लोन लेकर बढ़ाया अपना किराना का व्यवसाय, अब गांव के लोगों को लोन दिलाने में कर ही है मदद</strong></h3>
<h3><em><strong>व्यवसाय और खेती से विगत दो माह में कमा चुकी हैं लगभग 2 लाख रुपए से अधिक की राशि</strong></em></h3>
<p><em><strong>जशपुर //</strong></em><br />
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सुशासन में महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर उन्हें सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने केंद्र हेतु विभिन्न योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। इन योजनाओं से जुड़कर महिलाएं न सिर्फ अपने परिवार का सहारा बन रही हैं बल्कि दूसरी महिलाओं को भी रोजगार से जोड़ रही हैं।ऐसी ही कहानी है जशपुर जिले के बगीचा ब्लॉक की ग्राम झिक्की की रहने वाली <a href="http://google.com"><em><strong>श्रीमती नीतू गुप्ता</strong> </em></a>की। जो बिहान योजना से जुड़कर लखपति दीदी बन गई हैं और सक्रिय महिला के रूप में कार्य कर रही है।<br />
श्रीमती नीतू गुप्ता मुद्रा लोन के माध्यम से <a href="https://www.khaskhabar.news/assembly-secretary-met-the-governor/"><strong>अपना व्यवसाय</strong></a> को और बढ़ा रही है। सामान्य परिवार से आने वाली नीतू का सपना था की वह भी आत्मनिर्भर होकर अपने परिवार का सहारा बनें। इस तरह से अपने सपनों को पूरा करने के लिए वह बिहान योजना के तहत लक्ष्मी स्व सहायता समूह से जुड़ी। नीतू ने बताया कि उनकी एक छोटी सी किराने की दुकान है। जिससे वे बैंक लिंकेज के माध्यम से मुद्रा लोन लेकर व्यवसाय को बढ़ा रही है। इससे पहले वे सक्रिय महिला के रूप में कार्य करते हुए लोगों को जागरूक कर रहीं थीं। वे बताती है कि महिलाओं को समूह में जोड़ रही है और लोगों को लोन दिलाने का कार्य भी कर रही हैं।<br />
पहले गांव के लोग दूसरे लोगों से ही लोन लेते थे जिससे <a href="https://www.khaskhabar.news/big-breaking-there-was-a-lot-of-scuffle-among-the-policemen-in-the-police-station-situated-in-the-center-of-the-city/"><em><strong>अधिक ब्याज</strong></em></a> देना पड़ता था। अब बैंक लिकेज के माध्यम से मुद्रा लोन लेने की समझाईश देती है जिससे लोगों को कम ब्याज दर पर व्यवसाय के लिए पैसा मिल जा रहा है। साथ ही वे सिलाई का कार्य भी करती है। श्रीमती नीतू गुप्ता ने व्यवसाय को बढ़ाने के लिए मुद्रा लोन के माध्यम से एक लाख रूपए का लोन लिया है।<br />
श्रीमती नीतू गुप्ता अपने पति श्री सुनिल गुप्ता के साथ<a href="https://www.khaskhabar.news/husband-asked-his-wife-to-have-sex-with-friends-when-she-didnt-agree/"><em><strong> खेती कार्य</strong></em></a> में भी उनका साथ देती हैं। 07 एकड़ में वे टमाटर, खीरा, करेला लगाते हैं और माह में अच्छी आमदनी अर्जित कर रहे हैं। इस तरह वह विगत दो माह में 2 लाख 50 हजार कमा कर लखपति दीदी बन गई हैं।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>विचार/ लेख</category>
                                            <category>अन्य</category>
                                            <category>खबर विशेष</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़ विशेष</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Jan 2025 14:41:13 +0530</pubDate>
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