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                <title>EX MLA JAISINGH AGRAWAL - Khaskhabar News</title>
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                <description>EX MLA JAISINGH AGRAWAL RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>जयसिंह अग्रवाल ने बालको कूलिंग टाॅवर से प्रभावित शांतिनगर के 86 परिवारों को मुआवजा, पुनर्वास एवं रोजगार प्रदान करने के मुद्दे पर केन्द्रीय श्रम मंत्री को लिखा पत्र</title>
                                    <description><![CDATA[कोरबा// बालको द्वारा निर्मित कूलिंग टाॅवर से शांतिनगर के प्रभावित 86 परिवारों को शासन के दिशा निर्देशानुसार मुआवजा एवं पुनर्वास और बालको प्रबंधन द्वारा लिखित में दिए गए आश्वासनों पर अमल करने के विषय पर प्रबंधन की उदासीनता पर पूर्व कैबिनेट मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने भारत सरकार के श्रम मंत्री मनसुख लाल मंडाविया को पीड़ित […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.khaskhabar.news/other/jaisingh-aggarwal-on-the-issue-of-compensation-rehabilitation-and-employment-to-86-families-of-shantinagar-affected-by-balco-cooling-tower/article-3848"><img src="https://www.khaskhabar.news/media/400/2025-04/jaisingh-agrawal1.jpg" alt=""></a><br /><p><span style="color:#ff0000;"><em><strong>कोरबा// </strong></em></span><br />बालको द्वारा निर्मित कूलिंग टाॅवर से शांतिनगर के प्रभावित 86 परिवारों को शासन के दिशा निर्देशानुसार मुआवजा एवं पुनर्वास और बालको प्रबंधन द्वारा लिखित में दिए गए आश्वासनों पर अमल करने के विषय पर प्रबंधन की उदासीनता पर पूर्व कैबिनेट मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने भारत सरकार के श्रम मंत्री मनसुख लाल मंडाविया को पीड़ित परिवारों राहत पहुंचाने हेतु पत्र लिखा है। पूर्व मंत्री द्वारा लिखे गए पत्र में स्पष्ट तौर पर लिखा गया है कि बालको कूलिंग टाॅवर निर्माण एवं प्रचालन से शांतिनगर के नागरिकों ने स्वास्थ्यगत परेशानियां का हवाला देते हुए धरना प्रदर्शन करते हुए पूर्व में अग्र आंदलन किया था जिसे संज्ञान में लेकर जन प्रतिनिधियों एवं जिला प्रशासन के दबाव में त्रिपक्षीय वार्ता वर्ष 2013 में हुई और प्रभावित 86 परिवारों की समस्याओं के समाधान के लिए संभावित विकल्पों पर बनी सहमति के साथ ही बालको परियोजना प्रमुख जे के मुखर्जी ने बालको प्रबंधन के मंतव्य से जिला प्रशासन को लिखित में अवगत कराया था। बालको प्रबंधन के पत्र के अनुसार व्यपवर्तित भूमि और सामान्य भूमि के साथ ही कच्चा एवं पक्का मकान के लिए शासन द्वारा निर्धारित दर पर मुआवजा राशि का आकलन किया जाएगा और चरणबद्ध रूप में मुआवजा राशि का भुगतान किया जाएगा। शासन को दिए गए पत्र के अनुसार मुआवजे की सम्पूर्ण राशि का भुगतान प्राप्त कर लेने व बालको के पक्ष में रजिस्टीª कर देने के बाद संबंधित परिवारों का उस संपत्ति पर से कब्जा शून्य हो जाएगा।<br />केन्द्रीय श्रम मंत्री को लिखे पत्र में आगे बताया गया है कि लगभग 12 साल से अधिक का समय बीत चुका है और अभी भी बालको प्रबंधन ने सभी परिवारों को मुआवजे का भुगतान नहीं किया है। शांतिनगर पुनर्वास समिति के सदस्यों ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि अभी तक प्रबंधन ने 67 परिवारों को सम्पूर्ण भुगतान कर दिया है जबकि 19 परिवार ऐसे हैं जिनमें से कुछ को आंशिक भुगतान किया गया है तो कई अभी भी मुआवजा राशि प्राप्त की आशा में हैं लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि बालको प्रबंधन को उनकी पीड़ा से कोई सरोकार नहीं है। शांतिनगर के प्रभावित परिवारों के प्रतिनिधियों ने जानकारी दिया है कि वैसे तो विगत 8-10 सालों में बालको प्रबंधन को रोजगार प्रदान किए जाने विषयक प्रभावितों ने अनेक बार निवेदन किया है और हर बार प्रबंधन ने केवल मौखिक आश्वासन का झुनझुना ही पकड़ाया है। लगभग डेढ़ साल पहले कुल 39 योग्य और रोजगार प्राप्त करने के इच्छुक युवाओं की सूची प्रतिनिधियों द्वारा बालको प्रबंधन को सौंपी गई है जिस पर बालको के वरिष्ठ अधिकारी कोई बात नहीं करना चाहते और कनिष्ठ अधिकारियों के हवाले से कार्य हो जाएगा जैसे जुमले सुनने को मिलते हैं।</p>
<h3><strong><span style="color:#3366ff;"><em>⇓ </em>देखे लिखे गए पत्र की कॉपी ⇓</span></strong></h3>
<h3><em><strong><span style="color:#ff0000;"><a style="color:#ff0000;" href="https://www.khaskhabar.news/media/2025-06/adobe-scan-13-apr-2025.pdf">Adobe Scan 13 Apr 2025</a></span></strong></em></h3>
<p>मुलाकात करने वाले शांतिनगर के प्रतिनिधियों ने बताया कि उन सभी ने प्रबंधन के सामने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि बालको कम्पनी में सीधे तौर पर भले ही नियोजित न किया जा सके परन्तु बालको संयंत्र में स्थायी प्रकृति के प्रचालन और अनुरक्षण विभागों का कार्य करने वाली सहयोगी कम्पनियों में ही यथायोग्य रोजगार उपलब्ध करा दिए जाने से भी उनकी रोजी रोटी की समस्या का समाधान हो जाएगा। ऐसा प्रतीत होता है कि हर मामले को गंभीरता से न लेने की बालको प्रबंधन की आदत और वायदा खिलाफी की प्रवृत्ति ने इस मामले को भी ठंडेे बस्ते में डाल दिया है।<br />जयसिंह अग्रवाल ने केन्द्रीय श्रम मंत्री से आग्रह किया है कि बालको में भारत सरकार की 49 प्रतिशत की हिस्सेदारी आज भी कायम है, अतएव सरकार मानवीय संवेदना के तहत पीड़ित परिवारों से प्राथमिकता के आधार पर युवाओं को यथा योग्य रोजगार प्रदान करने हेतु भारत सरकार हस्तक्षेप कर बालको प्रबंधन को निर्देशित करेे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>राष्ट्रीय</category>
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                                            <category>खबर विशेष</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़ विशेष</category>
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                <pubDate>Sat, 19 Apr 2025 15:42:46 +0530</pubDate>
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                <title>पूर्व राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने लिखा केन्द्रीय कोयला मंत्री को पत्र</title>
                                    <description><![CDATA[जिले की कोयला खदान विस्तार परियोजनाओं से प्रभावित भू-विस्थापित परिवारों की पीड़ा से कराया अवगत कोरबा// पूर्व राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने कोरबा जिले में एस.ई.सी.एल. प्रबंधन द्वारा संचालित विभिन्न कोयला खदानों में किए जा रहे उत्खनन कार्य अथवा विस्तार परियोजनाओं के लिए अधिग्रहण हेतु चिन्हित भूमि से प्रभावित होने वाले परिवारों को प्राथमिकता के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.khaskhabar.news/other/former-revenue-minister-jaisingh-aggarwal-wrote-a-letter-to-the-union-coal-minister/article-3819"><img src="https://www.khaskhabar.news/media/400/2025-04/jaisingh-agrawal.jpg" alt=""></a><br /><h3><span style="color:#ff0000;"><em><strong>जिले की कोयला खदान विस्तार परियोजनाओं से प्रभावित भू-विस्थापित परिवारों की पीड़ा से कराया अवगत</strong></em></span></h3>
<p><span style="color:#ff0000;"><em><strong>कोरबा//</strong></em></span><br />
पूर्व राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने कोरबा जिले में एस.ई.सी.एल. प्रबंधन द्वारा संचालित विभिन्न कोयला खदानों में किए जा रहे उत्खनन कार्य अथवा विस्तार परियोजनाओं के लिए अधिग्रहण हेतु चिन्हित भूमि से प्रभावित होने वाले परिवारों को प्राथमिकता के आधार पर उचित मुआवजा, व्यवस्थापन एवं रोजगार प्रदान किए जाने के सम्बंध में केन्द्रीय कोयला मंत्री जी. किशन रेड्डी को पत्र लिखा है। जयसिंह अग्रवाल ने पत्र लिखा है कि विगत दिनों गेवरा विस्तार परियोजना में कोयला मंत्री का आगमन हुआ और कोयला उत्खनन से लेकर डिस्पैच तक की विभिन्न गतिविधियों का जायजा लिया। उत्पादन लक्ष्य हासिल करने की ओर अग्रसर प्रबंधन की तारीफ भी मंत्री ने किया और लक्ष्य हासिल करने की दिषा में उत्पन्न हो रहे गतिरोधों को दूर करने अनेक महत्वपूर्ण सुझाव भी उनके द्वारा दिया गया। एस.ई.सी.एल. प्रबंधन के अधिकारियों ने वाहवाही लूटने के लिए केवल उजला पक्ष ही कोयला मंत्री के समक्ष रखा।<br />
जयसिंह अग्रवाल ने पत्र में कोरबा जिला में संचालित विभन्न कोयला खदानों में व्याप्त विसंगतियों की तरफ कोयला मंत्री का ध्यान आकृष्ट करते हुए लिखा है कि गेवरा, दीपका, मानिकपुर कोरबा, कुसमुण्डा अथवा अन्य खदानों के लिए अधिग्रहीत की गई भूमि के मूल किसानों व भू-स्वामियों में से जिन परिवारों को विस्थापित होना पड़ा है, आज तक उन्हें नियमानुसार व्यवस्थापन जैसे उचित मुआवजा, बसाहट हेतु बुनियादी सुविधाएं यथा सड़क, पानी, बिजली, चिकित्सा और बच्चों की शिक्षा के लिए स्कूल आदि के साथ ही योग्य युवाओं को सहयोगी कम्पनियों के जरिए प्राथमिकता के आधार पर यथा योग्य रोजगार उपलब्ध करवाया जाय ताकि उन परिवारों को किसी प्रकार के आंदोलन का सहारा न लेना पड़े। पूर्वमंत्री ने अपने पत्र में यह भी लिखा है कि वास्तव में भू-विस्थापित परिवारों के लोगों को एसईसीएल प्रबंधन ही आंदोलन के लिए मजबूर करता है। हर बार केवल बैठकों के माध्यम से आश्वासन दियाजाता है और फिर कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। वास्तव में पीडि़त परिवार आंदोलन करने मजबूर होते हैं और प्रबंधन से वे कोई भीख नही ंमांगते हैं अपितु अपने हक की मांग करते हैंं जिनकी जमीन अधिग्रहित कर प्रबंधन कोयला उत्खनन कर लक्ष्य हासिल करता है उनकी समस्याओं का समाधान भी प्रबंधन को ही करना होगा। प्रबंधन की गैर जिम्मेदाराना कार्यषैली की वजह से ही भू-विस्थापित परिवारों को अनेक विसंगतियों का खामियाजा भुगतना पड़ता है।<br />
जयसिंह अग्रवाल ने पत्र में कोयला मंत्री से आग्रह किया है कि वे व्यक्तिगत रूचि लेकर मानवीय संवेदना के तहत एक निर्धारित समय सीमा में विस्थापित हुए परिवारों की समस्याओं का समाधान करने हेतु संबंधित अधिकारियों को निर्देशित करें। पत्र में आगे यह भी लिखा गया है कि गेवरा, मानिकपुर कोरबा, कुसमुण्डा अथवा दीपका सहित कोरबा जिले की कोयला खदानों में विस्तार कार्यक्रम के तहत अधिग्रहित की जाने वाली भूमि से प्रभावित होने वाले परिवारों को नियमानुसार समुचित व्यवस्थापन चरणबद्ध तरीके से यदि पहले ही कर दिया जाता है तो अंचल में एक सौहाद्र्रपूर्ण औद्योगिक वातावरण बना रहेगा और भविश्य में पीडि़त परिवारों को किसी आंदोलन हेतु विवष नहीं होना पड़ेगा।<br />
कोयला मंत्री को लिखे गए पत्र में आगे यह भी लिखा गया है कि कोयला खदानों में अपना पसीना बहाकर प्रबंधन के उत्पादन लक्ष्य को हासिल करने हेतु जी तोड़ मेहनत करने वाले खदान मजदूरों की कॉलोनियों में बुनियादी सुविधाओं का नितांत अभाव है। वे सभी मजदूर परिवार कीड़े मकोड़ों जैसी जिन्दगी जीने को मजबूर हैं। मकान क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, चारों तरफ कचरे के अंबार दिखाई पड़ते हैं, सड़कों की स्थिति ऐसी है कि पैदल चलना भी मुश्किल है, गर्मी का मौसम अभी शुरू ही हो रहा है लेकिन पानी का संकट गहराने लगा है। उन खदानकर्मियों को प्रबंधन द्वारा बुनियादी सुविधाए ंभी प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराए जाने हेतु निर्देशित किए जाने का आग्रह किया गया है, क्योंकि कोयला मंत्रालय को देषभर में संचालित कोयला खदानों के जरिए प्राप्त होने वाले कुल राजस्व में से सर्वाधिक राजस्व कोरबा जिला से ही प्राप्त होता है, अतएव एसईसीएल के पास धन की समस्या होने का प्रश्न ही नहीं उठता।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>विचार/ लेख</category>
                                            <category>अन्य</category>
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                <pubDate>Tue, 15 Apr 2025 23:06:32 +0530</pubDate>
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