भाटापारा। मालगुजारी व्यवस्था समाप्त हुए लंबा समय बीत चुका है, लेकिन ग्राम टोनाटार में तालाब के उपयोग को लेकर सामने आए विवाद ने पुराने अधिकारों और वर्तमान वैधानिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। गोंड समाज के ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि गांव के तालाबों में निस्तारी करने और मवेशियों को पानी पिलाने से उन्हें रोका जा रहा है। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि गांव के देवी-देवताओं की पूजा-पाठ को लेकर रोक संबंधी मुनियादी कराई गई। कोटवार के माध्यम से कथित मुनियादी के बाद मामला तूल पकड़ता जा रहा है।
मुनियादी के बाद बढ़ा आक्रोश
गोंड समाज के ग्रामीणों के अनुसार, संबंधित तालाबों का निर्माण पूर्व मालगुजार कुंजाम परिवार के पूर्वजों द्वारा कराया गया था। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि इन तालाबों का उपयोग लंबे समय से गांव के लोग सामूहिक रूप से निस्तारी और मवेशियों को पानी पिलाने के लिए करते आ रहे हैं।
ग्रामीणों के मुताबिक, कोटवार के माध्यम से मुनियादी कराकर तालाबों में निस्तारी नहीं करने की सूचना दी गई। जब ग्रामीणों ने इसका आधार जानना चाहा तो कथित तौर पर इसे मालगुजार परिवार के पुराने अधिकार से जोड़कर बताया गया। इसके बाद समाज के लोगों में नाराजगी बढ़ गई।
तालाब पर अधिकार का आधार क्या?
विवाद के बीच ग्रामीणों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति या परिवार का तालाब की जमीन पर वर्तमान में वैधानिक अधिकार है, तो उसका आधार राजस्व रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों में स्पष्ट होना चाहिए। केवल पुराने दावे या मौखिक मान्यता के आधार पर ग्रामीणों के सामूहिक उपयोग पर रोक लगाना उचित है या नहीं, इसकी प्रशासनिक जांच जरूरी है।
गोंड समाज ने प्रशासन से संबंधित तालाबों की जमीन के पुराने और वर्तमान राजस्व रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि दस्तावेजों के आधार पर स्वामित्व, उपयोग और अधिकार की वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए, ताकि विवाद का स्थायी समाधान हो सके।
कोटवार ने कहा—गोटिया के कहने पर हुई मुनियादी
मामले में संबंधित पक्ष का पक्ष जानने के लिए संवाददाता ने टोनाटार के मालगुजार लेखराम कुंजाम से मोबाइल नंबर 9399160073 पर संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन मोबाइल कवरेज क्षेत्र से बाहर बताया गया। वहीं ग्राम के कोटवार वेद प्रकाश ने बताया कि गोटिया के कहने पर गांव में मुनियादी कराई गई थी।
पूजा-पाठ रोकने के आरोप से संवेदनशील हुआ मामला
तालाब विवाद के साथ गोंड समाज ने गांव के देवी-देवताओं की पूजा-पाठ और पारंपरिक धार्मिक गतिविधियों को लेकर भी रोक लगाए जाने का आरोप लगाया है। समाज के लोगों का कहना है कि पूजा-पाठ और पारंपरिक धार्मिक गतिविधियां उनकी सामाजिक एवं सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा हैं। ऐसे में इन पर रोक संबंधी सूचना सामने आने से ग्रामीणों में असंतोष और बढ़ गया है।
प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग
गोंड समाज ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। ग्रामीण चाहते हैं कि तालाबों की जमीन, स्वामित्व, राजस्व रिकॉर्ड और वर्षों से हो रहे सामूहिक उपयोग की स्थिति की मौके पर जांच कराई जाए। साथ ही निस्तारी और मवेशियों के लिए पानी की सुविधा तथा पूजा-पाठ से रोक लगाए जाने के आरोपों की भी जांच की जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि मामले को विवाद या टकराव का रूप देने के बजाय प्रशासन को मौके पर पहुंचकर दस्तावेज और कानून के आधार पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। अब निगाहें प्रशासनिक जांच और राजस्व रिकॉर्ड पर हैं, जिनसे यह स्पष्ट हो सकेगा कि संबंधित तालाबों पर वर्तमान वैधानिक अधिकार किसका है और ग्रामीणों के निस्तारी उपयोग की स्थिति क्या है।




