जगदलपुर। लंबे समय तक नक्सलवाद के साए में रहे बस्तर की तस्वीर अब तेजी से बदल रही है। सुरक्षा व्यवस्था में सुधार और नक्सल प्रभाव में कमी के साथ क्षेत्र की प्राकृतिक खूबसूरती देशभर के पर्यटकों को आकर्षित कर रही है। मानसून में जलप्रपातों के रौद्र और मनमोहक स्वरूप को देखने के लिए छत्तीसगढ़ के साथ ही दूसरे राज्यों से भी बड़ी संख्या में पर्यटक बस्तर पहुंच रहे हैं। चित्रकोट और तीरथगढ़ जलप्रपात इन दिनों पर्यटकों के प्रमुख आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
चित्रकोट में वीकेंड पर भारी भीड़
इंद्रावती नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ चित्रकोट जलप्रपात का स्वरूप इन दिनों बेहद आकर्षक हो गया है। तेज बहाव के साथ गिरते पानी को देखने के लिए पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। खासकर 15 अगस्त के बाद यहां पर्यटकों की आवाजाही में तेजी देखी जा रही है।
शनिवार और रविवार को चित्रकोट में इतनी भीड़ पहुंच रही है कि पार्किंग स्थल भी छोटे पड़ रहे हैं। कई पर्यटकों को अपने वाहन जलप्रपात से काफी दूर खड़े करने पड़ रहे हैं। परिवारों के साथ युवा और दूसरे राज्यों से आने वाले पर्यटक भी बड़ी संख्या में यहां पहुंच रहे हैं।
तीरथगढ़ में भी बढ़ी सैलानियों की आवाजाही
कांगेर घाटी क्षेत्र स्थित तीरथगढ़ जलप्रपात भी मानसून में पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। बारिश के बाद जलप्रपात में पानी का प्रवाह बढ़ गया है। सीढ़ीनुमा चट्टानों से गिरते पानी का मनमोहक दृश्य पर्यटकों को खासा आकर्षित कर रहा है।
बस्तर आने वाले पर्यटक अब केवल चित्रकोट और तीरथगढ़ तक सीमित नहीं रह रहे हैं, बल्कि आसपास के अन्य प्राकृतिक और पर्यटन स्थलों को भी अपनी यात्रा में शामिल कर रहे हैं।
नक्सलवाद का डर कम हुआ तो बढ़ने लगा पर्यटन
लंबे समय तक नक्सलवाद के कारण बस्तर में पर्यटन गतिविधियां प्रभावित रही थीं। सुरक्षा को लेकर बनी आशंकाओं के चलते दूसरे राज्यों से आने वाले पर्यटक यहां आने से बचते थे। अब सुरक्षा की बेहतर स्थिति और नक्सलवाद के प्रभाव में कमी के बाद पर्यटकों का नजरिया बदल रहा है।
हाल ही में रायगढ़ से आए बाइक राइडर्स के एक दल ने बस्तर के विभिन्न पर्यटन स्थलों का भ्रमण किया। दल ने यहां की प्राकृतिक खूबसूरती की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए। सोशल मीडिया के जरिए बस्तर की सकारात्मक तस्वीर देश के दूसरे हिस्सों तक पहुंच रही है, जिससे बाहरी पर्यटकों में भी यहां घूमने की रुचि बढ़ रही है।
तेंदुआ और दो शावकों की मौजूदगी, मिचनार हिलटॉप बंद
इधर, पर्यटकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मिचनार हिलटॉप को 45 दिनों के लिए आम पर्यटकों के प्रवेश के लिए बंद कर दिया गया है। वन विभाग के अनुसार क्षेत्र में एक तेंदुआ और उसके दो शावकों की मौजूदगी देखी गई है। इसके मद्देनजर फिलहाल यहां पर्यटकों की आवाजाही पर रोक लगाई गई है।
45 दिनों की अवधि पूरी होने के बाद मिचनार हिलटॉप को पर्यटकों के लिए दोबारा खोला जाएगा या नहीं, इसे लेकर वन विभाग की ओर से फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है।
सोशल मीडिया से बन रही बस्तर की नई पहचान
बस्तर घूमने आने वाले पर्यटकों और बाइक राइडर्स द्वारा यहां के पर्यटन स्थलों की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए जा रहे हैं। इससे बस्तर की प्राकृतिक खूबसूरती देश के दूसरे शहरों और राज्यों तक पहुंच रही है। सोशल मीडिया पर बन रही यह सकारात्मक छवि पर्यटन को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभा रही है।
मानसून में चित्रकोट, तीरथगढ़ समेत बस्तर के अन्य जलप्रपातों और प्राकृतिक स्थलों पर बढ़ती पर्यटकों की भीड़ इस बदलाव का संकेत दे रही है। नक्सलवाद की पहचान से आगे बढ़कर बस्तर अब अपनी प्राकृतिक सुंदरता, जलप्रपातों और पर्यटन स्थलों के लिए नई पहचान बनाने की ओर बढ़ रहा है।




