दीपावली खुशियां बांटने और अपनों के साथ त्योहार मनाने का मौका है। महालक्ष्मी पूजन का श्रेष्ठ मुहूर्त शाम 6:05 से रात 8 बजे तक रहेगा। इस दौरान आतिशबाजी भी खुशियों का हिस्सा होती है। गली-मोहल्लों से लेकर खुले मैदानों तक लोग आतिशबाजी होती है। हालांकि, थोड़ी सी लापरवाही त्योहार की खुशियों को अस्पताल के चक्कर में बदल सकती है।
पटाखों से हाथ-पैर झुलसने, आंखों में चोट लगने और तेज आवाज से सुनने की क्षमता प्रभावित होने का खतरा रहता है। कई बार हादसे के बाद लोग जले हुए हिस्से पर टूथपेस्ट, घी या तेल लगा देते हैं, जिससे परेशानी बढ़ सकती है। इसलिए पटाखे जलाते समय सावधानी बरतने के साथ हादसा होने पर शुरुआती मिनटों में सही उपचार की जानकारी होना भी जरूरी है।
रायपुर के बर्न एंड प्लास्टिक सर्जरी स्पेशलिस्ट डॉ. सुनील कालडा से जानिए पटाखे जलाते समय किन सावधानियों का ध्यान रखें और जलने या चोट लगने पर तुरंत क्या करें।
1. पटाखों के साथ छेड़छाड़ न करें, हाथ में लेकर जलाना खतरनाक
पटाखों को उनकी बनावट और इस्तेमाल के निर्देशों के मुताबिक ही जलाना चाहिए। रॉकेट, अनार या दूसरे पटाखों को हाथ में लेकर जलाने की गलती न करें। ऐसा करने से पटाखा हाथ में ही फट सकता है और गंभीर चोट लग सकती है।
2. पटाखे जलाने का सही तरीका अपनाएं, आसपास जगह खाली रखें
पटाखे जलाने के लिए जल्दबाजी न करें। डॉ. कालडा के मुताबिक, अगरबत्ती या लंबी फुलझड़ी की मदद से पटाखे जलाना बेहतर रहता है। इससे हाथ और पटाखे के बीच दूरी बनी रहती है।
पटाखे जलाने से पहले आसपास की जगह खाली कर लें। रॉकेट और अनार जैसे पटाखों के लिए खुली जगह चुनें। आसपास मकान, वाहन, पेड़ या बिजली के तार नहीं होने चाहिए। एक समय में एक ही पटाखा जलाएं और बाकी लोगों को सुरक्षित दूरी पर रखें।
पटाखे से हाथ, पैर या शरीर का कोई हिस्सा जल जाए तो सबसे पहले उस व्यक्ति को आग और पटाखों से दूर सुरक्षित जगह पर ले जाएं। इसके बाद जले हुए हिस्से को सामान्य ठंडे बहते पानी के नीचे करीब 20 मिनट तक रखें।
4. आंख, कान या चेहरे पर चोट लगे तो घरेलू उपचार में समय न गंवाएं
पटाखों से निकलने वाली चिंगारी और बारूद के छोटे कण आंखों में जा सकते हैं। वहीं तेज धमाके से कानों को नुकसान पहुंच सकता है। ऐसे मामलों में लापरवाही नहीं करनी चाहिए।
आंख में चिंगारी या बारूद चला जाए तो आंख को साफ बहते पानी से धीरे-धीरे धोएं। आंख को रगड़ें नहीं और उसमें फंसी चीज को खुद निकालने की कोशिश न करें। इसके बाद तुरंत अस्पताल जाएं।
5. बुजुर्गों और बच्चों का रखें ध्यान
पटाखों से निकलने वाला धुआं आंखों और गले में जलन पैदा कर सकता है। तेज आवाज से कानों को नुकसान पहुंच सकता है। डॉ. सुनील कालडा के मुताबिक, ज्यादा बारूद और तेज आवाज वाले पटाखों से बचना चाहिए। कम आवाज वाले और स्काई शॉट जैसे विकल्पों को प्राथमिकता देनी चाहिए।
बच्चों को पटाखे जलाने के लिए अकेला न छोड़ें। उन्हें बड़े लोगों की निगरानी में ही आतिशबाजी करने दें। पटाखे जलाते समय छोटे बच्चों को गोद में लेकर आतिशबाजी न करें।
6. कपड़ों का ड्रेस कोड भी जरूरी, कॉटन के फिट कपड़े पहनें
पटाखे जलाते समय कपड़ों का चुनाव भी हादसों से बचा सकता है। ढीले और लहराते कपड़े जैसे दुपट्टा, साड़ी का पल्लू, लंबा कुर्ता या खुली बाजू वाले कपड़े आग की चपेट में आ सकते हैं।
पटाखे जलाते समय शरीर से फिट और मोटे सूती कपड़े पहनना बेहतर है। सिंथेटिक कपड़ों से बचें, क्योंकि आग या तेज गर्मी के संपर्क में आने पर ये पिघलकर त्वचा से चिपक सकते हैं।
इसके अलावा बाल बांधकर रखें और पैरों में बंद जूते पहनें। चप्पल पहनकर पटाखे जलाने से पैर में चिंगारी या जलते बारूद से चोट लग सकती है।
7. घर में तैयार रखें इमरजेंसी किट, हादसे के समय आएगी काम
दीपावली के दौरान पटाखों के अलावा दीयों, मोमबत्तियों और बिजली की सजावट से भी आग लगने का खतरा रहता है। इसलिए घर में एक इमरजेंसी किट तैयार रखें। इसे ऐसी जगह रखें, जहां जरूरत पड़ने पर तुरंत इस्तेमाल किया जा सके।
घर में एक बाल्टी पानी और रेत भी तैयार रखें। इस्तेमाल किए हुए पटाखों को पानी से भरी बाल्टी में डालें, ताकि उनमें बची चिंगारी से दोबारा आग न लगे।




