छत्तीसगढ़ में पटवारी संघ ने अपनी तीन प्रमुख मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। प्रांतीय आह्वान पर बिलासपुर जिला पटवारी संघ भी आंदोलन में शामिल हो गया है। हड़ताल के चलते किसानों और जमीन संबंधी काम कराने पहुंचे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। राजस्व से जुड़े कामकाज भी प्रभावित होने लगे हैं। पटवारी संघ का कहना है कि मांगें पूरी होने तक हड़ताल जारी रहेगी।
पटवारी संघ ने गिरदावरी की जटिल प्रक्रिया को सरल और व्यावहारिक बनाने की मांग की है। संघ का कहना है कि मौजूदा प्रक्रिया में कई तरह की दिक्कतें आती हैं। इससे पटवारियों के साथ किसानों को भी परेशानी होती है। संघ चाहता है कि गिरदावरी की व्यवस्था ऐसी हो, जिससे मैदानी स्तर पर काम करना आसान हो और किसानों को बेवजह परेशान न होना पड़े।
पटवारी संघ ने पदोन्नति प्रक्रिया में सुधार की मांग भी की है। संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि पटवारियों को वरिष्ठता के आधार पर नियमित रूप से पदोन्नति मिलनी चाहिए। इसके लिए नियम स्पष्ट होने चाहिए, ताकि कर्मचारियों को सेवा में आगे बढ़ने का अवसर मिल सके। संघ ने शासन से इस संबंध में जल्द निर्णय लेने की मांग की है।
डिजिटल हस्ताक्षर से धान खरीदी तक के काम प्रभावित
पटवारी संघ के पदाधिकारियों के मुताबिक, हड़ताल से डिजिटल हस्ताक्षर, धान खरीदी, जमीन का सीमांकन, नामांतरण और बंटवारा जैसे राजस्व कार्य प्रभावित हो रहे हैं। जाति, निवास और आय प्रमाण पत्र बनवाने वाले विद्यार्थियों और आम लोगों को भी परेशानी हो सकती है। आंदोलन के पहले ही दिन पटवारी और तहसील कार्यालयों में लोग अपने काम के लिए भटकते नजर आए।
राजस्व के लंबित मामलों की संख्या बढ़ने की आशंका
पटवारी जमीन से जुड़े रिकॉर्ड रखने और राजस्व संबंधी कामकाज में अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में हड़ताल लंबी चलने पर लंबित आवेदनों और राजस्व के मामलों की संख्या बढ़ सकती है। पटवारी संघ ने साफ कहा है कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।



