तुस्मा/शिवरीनारायण। ग्राम पंचायत तुस्मा में तहसील कार्यालय के बाजू स्थित गौठान में गोवंशों की बदहाल स्थिति सामने आने के बाद पशुओं की देखरेख और गौठान संचालन की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यहां लगभग 17 गोवंशों की हालत बेहद खराब बताई जा रही है। परिसर में कीचड़ और गंदगी के बीच पड़े मवेशियों की स्थिति देखकर पशु संरक्षण के दावों पर सवाल उठने लगे हैं। गौठान का टीन शेड भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त बताया जा रहा है, जिससे बारिश और ठंड के मौसम में गोवंशों को सुरक्षित आश्रय मिलने पर संदेह पैदा हो रहा है।
बताया जा रहा है कि कई गायों की आंखों को कौवे और चील जैसे पक्षियों ने नुकसान पहुंचाया है। मवेशियों की इस स्थिति ने उनकी नियमित देखभाल, भोजन-पानी और समय पर पशु चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी मिलते ही शिवरीनारायण के गोसेवक पहुंचे मौके पर
गौठान में गोवंशों की दुर्दशा की जानकारी मिलते ही शिवरीनारायण के गोसेवक तत्काल मौके पर पहुंचे। वहां की स्थिति का जायजा लेने के बाद उन्होंने संबंधित अधिकारियों से गोवंशों के उपचार, सुरक्षित आश्रय और समुचित देखरेख की व्यवस्था करने की मांग की। मौके पर मवेशियों की हालत देखकर गोसेवकों ने नाराजगी जताई और तत्काल उचित कार्रवाई की मांग की।
गोसेवकों के आक्रोश और हस्तक्षेप के बाद संबंधित अधिकारी भी तत्काल मौके पर पहुंचे और व्यवस्था को लेकर कार्रवाई करते नजर आए। हालांकि, अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि मौके पर पहुंचकर कार्रवाई करने तक ही मामला सीमित रहेगा या गौठान की बदहाली के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही भी तय की जाएगी।
ग्राम पंचायत तुस्मा की व्यवस्था पर सवाल
ग्राम पंचायत तुस्मा में संचालित गौठान की ऐसी स्थिति आखिर कैसे बनी? गोवंशों की नियमित देखभाल की जिम्मेदारी किसकी है? टीन शेड क्षतिग्रस्त होने और मवेशियों की हालत बिगड़ने के बावजूद समय रहते व्यवस्था में सुधार क्यों नहीं किया गया? ये ऐसे सवाल हैं, जिनका जवाब संबंधित जिम्मेदारों को देना चाहिए।
सबसे अहम सवाल यह भी है कि जब गौठान ग्राम पंचायत तुस्मा में संचालित है, तो वहां के स्थानीय लोगों ने इस बदहाली पर आवाज क्यों नहीं उठाई? आखिर गोवंशों की दुर्दशा सामने आने के बाद शिवरीनारायण के गोसेवकों को मौके पर पहुंचकर हस्तक्षेप करने की जरूरत क्यों पड़ी? क्या स्थानीय स्तर पर इस समस्या की जानकारी संबंधित जिम्मेदारों तक नहीं पहुंची थी, या फिर शिकायतों और समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया गया?
इन सवालों का जवाब मिलना जरूरी है, ताकि गौठान की व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित न रहे और बेजुबान पशुओं को वास्तव में सुरक्षा मिल सके।
अब कार्रवाई और जवाबदेही का इंतजार
गोसेवकों के हस्तक्षेप के बाद अधिकारियों का मौके पर पहुंचना तत्काल राहत की दिशा में एक कदम माना जा सकता है, लेकिन स्थायी समाधान के लिए गौठान की व्यवस्थाओं में सुधार आवश्यक है। बीमार और घायल गोवंशों का उपचार, पर्याप्त चारा-पानी, साफ-सफाई तथा क्षतिग्रस्त टीन शेड की मरम्मत प्राथमिकता से होनी चाहिए।
अब सवाल सिर्फ गोवंशों को राहत दिलाने का नहीं, बल्कि उनकी इस हालत के लिए जिम्मेदारी तय करने का भी है। क्या ग्राम पंचायत तुस्मा के गौठान की बदहाली के जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी, या फिर मामला कुछ समय बाद ठंडे बस्ते में चला जाएगा? यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है।



