दिल्ली में शनिवार को प्रस्तावित कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन से पहले लगाए गए सुरक्षा प्रतिबंधों पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कदम उठाना जरूरी है, लेकिन इसके नाम पर राजधानी में सब कुछ ठप नहीं किया जा सकता। मेट्रो स्टेशनों को बंद करने और ट्रेनों की आवाजाही प्रभावित होने से आम यात्रियों को होने वाली परेशानी पर भी अदालत ने चिंता जताई।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने अधिकारियों से कहा कि उन मेट्रो स्टेशनों की संख्या कम करने पर विचार किया जाए, जिन्हें बंद रखने का प्रस्ताव है। कोर्ट ने सड़कों पर लगाए गए प्रतिबंधों की भी समीक्षा करने और यह आकलन करने का निर्देश दिया कि किन इलाकों में पाबंदियां जरूरी हैं और कहां इनमें ढील दी जा सकती है।
यह सुनवाई CPM महासचिव एमए बेबी की ओर से दाखिल याचिका पर हुई। याचिका में मेट्रो स्टेशन बंद करने और ट्रेनों को रद्द किए जाने के खिलाफ राहत मांगी गई है। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के मद्देनजर सार्वजनिक परिवहन को बाधित करने से आम लोगों की आवाजाही प्रभावित हो रही है।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों के जवाब में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वह सरकार से परामर्श करेंगे और मेट्रो तथा रेलवे स्टेशनों के संबंध में उचित कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने जुलाई में हुए पिछले CJP प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा का भी उल्लेख किया।
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में मेट्रो पाबंदियों पर क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सुरक्षा एजेंसियों को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए नियामक उपाय लागू करने का अधिकार है, लेकिन इन उपायों से आम लोगों की आवाजाही पूरी तरह बाधित नहीं होनी चाहिए। अदालत ने खास तौर पर उन यात्रियों की परेशानी का जिक्र किया, जो गुरुग्राम, ग्रेटर नोएडा, पूर्वी दिल्ली और दक्षिणी दिल्ली से कामकाज के लिए आते-जाते हैं।
कोर्ट ने कहा कि हर व्यक्ति के पास निजी कार या वाहन नहीं होता और बड़ी संख्या में लोग सार्वजनिक परिवहन पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में मेट्रो स्टेशनों को पूरी तरह बंद करना और लोगों को परिवहन के विकल्पों से वंचित करना व्यावहारिक नहीं है।
कपिल सिब्बल ने उठाया शांतिपूर्ण प्रदर्शन का मुद्दा
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने अदालत में कहा कि ट्रेनों को रद्द किए जाने और मेट्रो स्टेशनों को बंद किए जाने से लोगों के लिए एक जगह से दूसरी जगह जाना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के कारण आम नागरिकों की आवाजाही पर इतने व्यापक प्रतिबंध क्यों लगाए जा रहे हैं।
सरकार ने उचित कदम उठाने का दिया भरोसा
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि वह सरकार से परामर्श करेंगे। उन्होंने भरोसा दिलाया कि रेलवे और मेट्रो स्टेशनों से जुड़े प्रतिबंधों के संबंध में उचित कदम उठाए जाएंगे। कोर्ट ने अधिकारियों से सुरक्षा जरूरतों और जनसुविधा के बीच संतुलन बनाने को कहा।
सड़कों पर लगी पाबंदियों की भी होगी समीक्षा
सुप्रीम कोर्ट ने सड़कों को बंद करने के फैसले पर भी दोबारा विचार करने की जरूरत बताई। अदालत ने निर्देश दिया कि यह आकलन किया जाए कि किन क्षेत्रों में प्रतिबंध आवश्यक हैं और किन इलाकों में लोगों की आवाजाही को सामान्य रखा जा सकता है।



