लिलेश्वर डोंगरे. देवभोग। नगर पंचायत क्षेत्र में बिना पट्टे की भूमि पर वर्षों से काबिज गरीब परिवारों को बिजली बिल, निवास और कब्जे से जुड़े दस्तावेजों के आधार पर प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ देने की पहल के बावजूद देवभोग नगर पंचायत में प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। करीब 21 परिवारों ने चार माह पहले बिजली बिल समेत आवश्यक दस्तावेज नगर पंचायत में जमा कराए हैं, लेकिन अब तक न तो स्थल एवं दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया पूरी हुई और न ही उनके आवेदन ऑनलाइन हो सके हैं। इसके चलते गरीब परिवार आज भी कच्चे और जर्जर मकानों में रहने को मजबूर हैं।
बताया गया है कि पुणन सिंह, भुवनलाल सिन्हा, टंकधर यादव, सीताराम सिन्हा और कृष्णा सोनी समेत 21 हितग्राहियों ने प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ लेने के लिए नगर पंचायत में आवेदन और आवश्यक दस्तावेज जमा किए हैं। हितग्राहियों का कहना है कि बारिश के मौसम में मिट्टी की कमजोर दीवारों और जर्जर खपरैल छत वाले मकानों में रहना बेहद मुश्किल हो जाता है। ऐसे में पक्के मकान की सुविधा उनके लिए सिर्फ सरकारी योजना नहीं, बल्कि परिवार की सुरक्षा से जुड़ी जरूरत है।
चार माह से सत्यापन का इंतजार
हितग्राहियों के मुताबिक आवेदन जमा करने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि नगर पंचायत और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम मौके पर पहुंचकर भूमि, मकान और दस्तावेजों का सत्यापन करेगी। इसके बाद पात्र हितग्राहियों के आवेदन ऑनलाइन किए जाएंगे और आवास स्वीकृति की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। लेकिन चार माह बीत जाने के बाद भी स्थल सत्यापन की कार्रवाई शुरू नहीं हो सकी है।
हितग्राहियों का कहना है कि वे नगर पंचायत के कर्मचारियों से लेकर मुख्य नगर पालिका अधिकारी तक लगातार अपनी समस्या बता रहे हैं। बावजूद इसके अब तक ठोस कार्रवाई नहीं होने से उनकी परेशानी बढ़ती जा रही है।
तहसील को पत्र तक नहीं भेजे जाने का आरोप
मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह उठ रहा है कि स्थल एवं दस्तावेज सत्यापन के लिए नगर पंचायत द्वारा तहसील कार्यालय को अब तक आवश्यक पत्र भेजा गया है या नहीं। हितग्राहियों और पार्षद का आरोप है कि संयुक्त सत्यापन टीम गठित करने के लिए तहसील कार्यालय को पत्र ही नहीं भेजा गया। यदि राजस्व और नगर पंचायत की संयुक्त टीम समय पर मौके का निरीक्षण करती तो पात्र परिवारों के आवेदन ऑनलाइन होने के साथ आवास स्वीकृति की प्रक्रिया भी आगे बढ़ सकती थी।
पार्षद ने सीएम हेल्पलाइन में दर्ज कराई शिकायत
हितग्राहियों की परेशानी को देखते हुए माता बहादुर कालरिन वार्ड की पार्षद प्रतिमा सोनी ने करीब पखवाड़े भर पहले मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई थी। इसमें प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों के स्थल एवं दस्तावेज सत्यापन के लिए तहसील कार्यालय को पत्र भेजने तथा राजस्व विभाग और नगर पंचायत की संयुक्त टीम से जांच कराने की मांग की गई थी।
पार्षद का आरोप है कि शिकायत के बावजूद तहसील कार्यालय को पत्र जारी नहीं किया गया। वहीं सीएम हेल्पलाइन में भेजे गए निराकरण प्रतिवेदन में शिकायतकर्ता से संपर्क करने और स्थल निरीक्षण किए जाने का उल्लेख किया गया है। प्रतिमा सोनी ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि न तो उनसे संपर्क किया गया और न ही संबंधित हितग्राहियों से जानकारी ली गई। ऐसे में शिकायत के निराकरण में स्थल निरीक्षण और संपर्क किए जाने का उल्लेख समझ से परे है।
कलेक्टर के समक्ष हितग्राहियों को ले जाने की तैयारी
आवेदन ऑनलाइन नहीं होने और सत्यापन की प्रक्रिया अटके रहने से हितग्राहियों के साथ पार्षदों में भी नाराजगी है। लगातार मांग के बावजूद कार्रवाई नहीं होने पर कुछ पार्षद अब हितग्राहियों को नवपदस्थ कलेक्टर रणवीर शर्मा के समक्ष ले जाकर मामले की वास्तविक स्थिति से अवगत कराने की तैयारी में हैं।
पार्षदों का कहना है कि कलेक्टर से स्थल निरीक्षण, दस्तावेज सत्यापन और पात्र हितग्राहियों के आवेदन ऑनलाइन कराने के लिए सीधे हस्तक्षेप की मांग की जाएगी, ताकि वर्षों से कच्चे मकानों में रह रहे गरीब परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिल सके।
सीएमओ बोले- आवेदन मेरे पास नहीं आया
नगर पंचायत के सीएमओ दुष्यंत साहू ने कहा, “किसके पास आवेदन किए हैं? आवेदन मेरे पास नहीं आया है। आवेदन जैसे आएगा, वैसे ही मैं मार्क कर दूंगा।”
उपाध्यक्ष ने कार्रवाई नहीं होने पर जताई नाराजगी
नगर पंचायत उपाध्यक्ष सुशील यादव ने जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए कहा, “नगर पंचायत के जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते अब तक टीम गठित नहीं हो सकी है। यही वजह है कि पात्र हितग्राहियों के फॉर्म ऑनलाइन नहीं हो पाए हैं। कल प्रगति के लिए पत्र निकालने की बात रखेंगे। इसके बाद भी स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो सीएमओ को हटाने की मांग विभागीय मंत्री से करेंगे।”
पार्षद बोलीं- पहल हुई, लेकिन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी
पार्षद प्रतिमा सोनी ने कहा, “बिजली बिल, संपत्ति कर, नल टैक्स सहित अन्य दस्तावेज रखने वाले हितग्राहियों को बिना पट्टे के बसे आबादी भूमि पर आवास देने की पहल सरकार ने की है। इसके लिए मैंने करीब तीन माह पहले नगर पंचायत में आवेदन दिए और हितग्राहियों के आवेदन ऑनलाइन नहीं होने को लेकर शिकायत भी दर्ज कराई। लेकिन न तो मुझसे और न ही हितग्राहियों से संपर्क किया गया और न तहसील कार्यालय को पत्र जारी किया गया। इसके बावजूद सीएम हेल्पलाइन में शिकायत का निराकरण बता दिया गया, जो सरासर गलत है।”
अब देखना होगा कि नगर पंचायत और राजस्व विभाग के बीच अटकी सत्यापन प्रक्रिया कब शुरू होती है और चार माह से प्रधानमंत्री आवास की राह देख रहे 21 गरीब परिवारों के आवेदन कब ऑनलाइन होकर योजना की अगली प्रक्रिया तक पहुंचते हैं।



