जांजगीर-चांपा। ग्राम कन्हाईबंद में संचालित मेसर्स शारदा मां लॉजिस्टिक्स प्रा. लि. के कोल डिपो में जांच के दौरान कई अनियमितताएं सामने आने के बाद कलेक्टर जन्मेजय महोबे ने फर्म को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। फर्म को नोटिस में बताई गई कमियों और नियमों के उल्लंघन को लेकर 15 दिन के भीतर अपना जवाब कार्यालय कलेक्टर जिला जांजगीर-चांपा में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
मामला खनिज कोयले के अस्थायी भंडारण की अनुज्ञप्ति से जुड़ा है। कन्हाईबंद में फर्म को कुल 1.503 हेक्टेयर जमीन पर एक समय में 80 हजार मीट्रिक टन कोयले के अस्थायी भंडारण की अनुमति दी गई है। यह अनुज्ञप्ति 26 फरवरी 2020 से 25 फरवरी 2030 तक के लिए है।
खनिज निरीक्षक की मौके पर जांच, एसडीएम जांजगीर से मिले प्रतिवेदन और संबंधित विभागों के दस्तावेजों की जांच में कई कमियां सामने आने के बाद कलेक्टर ने यह नोटिस जारी किया है।
जांच के दौरान सामने आया कि जिस क्षेत्र में कोयले का अस्थायी भंडारण किया जाना था, उसे तार फेंसिंग या ईंट की दीवार से घेरा नहीं गया था। इसे खनिज भंडारण से जुड़े नियमों का उल्लंघन माना गया है।
इसके अलावा कोल डिपो में आने वाले और बाहर भेजे जाने वाले कोयले की मात्रा तथा अन्य जरूरी जानकारी निर्धारित रजिस्टर या प्रारूप में दर्ज नहीं मिली। जांच टीम द्वारा रिकॉर्ड मांगे जाने पर आवश्यक अभिलेख भी प्रस्तुत नहीं किए गए।
फर्म द्वारा कोल डिपो से संबंधित मासिक विवरणी भी नियमित रूप से प्रस्तुत नहीं किए जाने की बात सामने आई है। वहीं जांच के दौरान मजदूरों की सुरक्षा के लिए जरूरी व्यवस्थाओं में भी कमी मिली। भंडारण क्षेत्र में प्राथमिक चिकित्सा सुविधा, अग्निशमन यंत्र और मजदूरों के लिए आवश्यक सुरक्षा किट उपलब्ध नहीं पाए गए।
एसडीएम जांजगीर से प्राप्त रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि फर्म द्वारा करीब 1.948 हेक्टेयर यानी 4.80 एकड़ क्षेत्र में कोल डिपो संचालित किया जा रहा है, जबकि अनुमति केवल 1.503 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए दी गई है। यानी अनुमति वाले क्षेत्र से अधिक जमीन में कोल डिपो संचालित किए जाने की बात जांच में सामने आई है।
इसके अलावा डिपो क्षेत्र में पर्याप्त वृक्षारोपण नहीं पाया गया। जांच में यह भी सामने आया कि प्रदूषित पानी का उचित उपचार किए बिना उसे नाले में छोड़ा जा रहा था।
बिना विकास अनुमति के निर्माण और रेलवे दस्तावेजों पर भी उठे सवाल
नगर तथा ग्राम निवेश विभाग से मिले पत्र में बताया गया कि कन्हाईबंद के कई खसरा नंबर जांजगीर विकास योजना के अंतर्गत शामिल हैं। इन जमीनों पर विकास अनुज्ञा के लिए आवेदन किए बिना निर्माण कर व्यावसायिक रूप से कोयला भंडारण का काम संचालित किए जाने की बात सामने आई है।
इस मामले में संबंधित विभाग की ओर से भूमि विकास, अवैध निर्माण हटाने या जमीन को पूर्व स्थिति में लाने के संबंध में भी नोटिस जारी किया गया है।
वहीं दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे, बिलासपुर की ओर से भी कोल डिपो संचालन से जुड़े दस्तावेजों पर आपत्ति दर्ज की गई है। रेलवे की रिपोर्ट के अनुसार कोल डिपो संचालन के लिए प्रस्तुत दस्तावेजों में रेलवे अंडरब्रिज को सही तरीके से प्रदर्शित नहीं किया गया था। रेलवे ने गलत अथवा अधूरे दस्तावेज प्रस्तुत किए जाने को लेकर भी आपत्ति जताई है।
इन सभी बिंदुओं को कलेक्टर द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस में शामिल किया गया है। फर्म से कहा गया है कि वह नोटिस में बताए गए सभी मामलों पर अपना पक्ष स्पष्ट करे और निर्धारित समय के भीतर जवाब प्रस्तुत करे।
निर्धारित 15 दिन की अवधि में जवाब नहीं देने पर एकपक्षीय कार्रवाई की जाएगी। नोटिस में कहा गया है कि छत्तीसगढ़ खनिज (खनन, परिवहन तथा भंडारण) नियम, 2009 के संबंधित प्रावधानों के उल्लंघन के तहत कार्रवाई की जा सकती है। इसकी जिम्मेदारी संबंधित फर्म की होगी।



