रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नक्सलवाद और हिंसा के समर्थन को लेकर कड़ा रुख जाहिर करते हुए कहा है कि नक्सली हिंसा का समर्थन करने वाले और कुख्यात नक्सली हिड़मा को आदर्श मानने वाले लोग ही ‘दिमागी नक्सली’ हैं। उन्होंने कहा कि बंदूक और हिंसा के दम पर निर्दोष लोगों की जान लेने वाला व्यक्ति किसी भी समाज का नायक नहीं हो सकता।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने दशकों तक नक्सली हिंसा का दर्द झेला है। खासकर बस्तर में हजारों परिवारों ने अपने अपनों को खोया है। नक्सली हिंसा का असर केवल लोगों की जान जाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इससे क्षेत्र के विकास की गति भी प्रभावित हुई। ऐसे में हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों का महिमामंडन करना उन परिवारों के जख्मों को कुरेदने और शहीद जवानों के बलिदान को नजरअंदाज करने जैसा है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपनी बात रखने, सवाल उठाने और सरकार की नीतियों से असहमति जताने का पूरा अधिकार है। असहमति लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन हिंसा को जायज ठहराना लोकतांत्रिक अधिकार नहीं हो सकता। निर्दोष नागरिकों की हत्या करने वालों को नायक के रूप में प्रस्तुत करना किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
‘हिंसक विचारधारा भी उतनी ही बड़ी चुनौती’
मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद की चुनौती केवल जंगलों में मौजूद हथियारबंद समूहों तक सीमित नहीं है। हिंसा और आतंक को सही ठहराने वाली मानसिकता भी उतनी ही गंभीर चुनौती है। ऐसी विचारधारा युवाओं और समाज के बीच भ्रम पैदा करती है तथा विकास और शांति के रास्ते में बाधा बनती है।
उन्होंने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई केवल सुरक्षा बलों की लड़ाई नहीं है, बल्कि यह बस्तर के भविष्य, वहां के लोगों के अधिकार और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की लड़ाई भी है। सुरक्षा बलों के जवानों ने कठिन परिस्थितियों में अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए बलिदान दिया है। वहीं, स्थानीय नागरिकों के सहयोग से भी क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है।
‘बस्तर की पहचान अब शांति और विकास से हो’
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बदलते छत्तीसगढ़ में बस्तर की नई पहचान बनाने की जरूरत है। बस्तर को अब नक्सली हिंसा के लिए नहीं, बल्कि शांति, शिक्षा, विकास, पर्यटन और रोजगार के नए अवसरों के लिए जाना जाना चाहिए।
उन्होंने समाज से अपील करते हुए कहा कि हिंसा और आतंक का किसी भी रूप में महिमामंडन नहीं होना चाहिए। नक्सली हिंसा में जान गंवाने वाले निर्दोष नागरिकों और शहीद जवानों के बलिदान को याद रखते हुए समाज को शांति और विकास के पक्ष में मजबूती से खड़ा होना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर के उज्ज्वल भविष्य के लिए हिंसा की विचारधारा को पीछे छोड़कर विकास और विश्वास का रास्ता अपनाना ही सबसे महत्वपूर्ण है।



