छत्तीसगढ़ के उच्चशिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा का ड्रीम प्रोजेक्ट लांच
रायपुर। छत्तीसगढ़ के जनजातीय जिलों एवं विकासखंडों में स्थित 148 महाविद्यालयों में अध्ययनरत स्नातक एवं स्नातकोत्तर छात्र-छात्राओं की अंग्रेजी संप्रेषणात्मक क्षमता विकसित करने के उद्देश्य से प्रदेशव्यापी 90 दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारंभ किया गया है। यह कार्यक्रम विद्यार्थियों में आत्मविश्वास बढ़ाने, अंग्रेजी भाषा में प्रभावी संवाद स्थापित करने तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संपर्क और सहभागिता की क्षमता विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। प्रदेश के जनजातीय, ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों को अंग्रेजी भाषा के माध्यम से अपनी प्रतिभा और क्षमताओं को बेहतर ढंग से प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान करना इस प्रशिक्षण का प्रमुख उद्देश्य है।
प्रदेश के यशस्वी एवं दूरदर्शी मुख्यमंत्री माननीय विष्णुदेव साय की मंशा के अनुरूप तथा उच्च शिक्षा, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री माननीय टंकराम वर्मा की प्रेरणा से इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत की गई है। उच्च शिक्षा सचिव श्री अविनाश चम्पावत, आई.ए.एस. एवं उच्च शिक्षा आयुक्त श्रीमती रीता यादव आई.ए.एस. के आदेशानुसार उच्च शिक्षा संचालनालय के आर.क्यू.आई.ए.सी.सी. (RQIACC) एवं रूसा (RUSA) के अंतर्गत प्रदेश स्तर पर इस कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है।
दिनांक 03 नवंबर 2026 से प्रारंभ हुआ यह प्रशिक्षण कार्यक्रम आगामी 90 दिनों तक निरंतर संचालित होगा। कार्यक्रम के अंतर्गत कुल 90 घंटे का प्रशिक्षण निर्धारित किया गया है। महाविद्यालय स्तर पर आयोजित इस प्रशिक्षण के माध्यम से विद्यार्थियों को अंग्रेजी भाषा में संवाद करने, अपने विचारों को स्पष्ट रूप से व्यक्त करने तथा विभिन्न शैक्षणिक एवं व्यावसायिक परिस्थितियों में प्रभावी संप्रेषण करने के लिए तैयार किया जाएगा।
विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास और आत्मविश्वास पर विशेष जोर: वर्तमान समय में अंग्रेजी भाषा केवल एक विषय तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि उच्च शिक्षा, रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं, साक्षात्कार और विभिन्न संस्थागत गतिविधियों में प्रभावी सहभागिता का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन चुकी है। ऐसे में विद्यार्थियों के लिए अंग्रेजी संप्रेषण क्षमता का विकास आवश्यक माना जा रहा है।
विशेषकर जनजातीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों के महाविद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को अपनी शैक्षणिक योग्यता के साथ-साथ संवाद कौशल और आत्मविश्वास विकसित करने के अवसर उपलब्ध कराना इस कार्यक्रम की महत्वपूर्ण विशेषता है।
कई विद्यार्थी शैक्षणिक रूप से प्रतिभाशाली होने के बावजूद अंग्रेजी में बातचीत करने, अपने विचार व्यक्त करने अथवा साक्षात्कार के दौरान आत्मविश्वास के साथ उत्तर देने में कठिनाई महसूस करते हैं। इस प्रशिक्षण के माध्यम से ऐसी परिस्थितियों में विद्यार्थियों की क्षमता को विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।
कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को अंग्रेजी भाषा के प्रति सहज बनाना तथा उन्हें दैनिक जीवन में संवाद करने के लिए प्रेरित करना है। इसके साथ ही विद्यार्थियों में अपनी बात प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने, दूसरों के विचारों को समझने और संवाद के माध्यम से सकारात्मक संबंध स्थापित करने की क्षमता विकसित करने पर भी जोर दिया जा रहा है।
प्रदेश स्तर पर राज्य समन्वयक एवं संभागीय नोडल अधिकारियों की नियुक्ति: इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के प्रभावी एवं व्यवस्थित क्रियान्वयन के लिए प्रदेश स्तर पर प्रशासनिक एवं शैक्षणिक समन्वय की व्यवस्था की गई है।
कार्यक्रम के राज्य समन्वयक के रूप में डॉ. सोमाली गुप्ता, प्राचार्य, शासकीय वीर शहीद दुर्वासा निषाद महाविद्यालय, अर्जुन्दा, जिला बालोद को नियुक्त किया गया है। उन्हें प्रदेश स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम के संचालन, समन्वय एवं प्रभावी क्रियान्वयन की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इसी प्रकार प्रदेश के विभिन्न संभागों में प्रशिक्षण कार्यक्रम के संचालन एवं समन्वय के लिए संभागीय नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। दुर्ग संभाग के लिए स्वयं डॉ. सोमाली गुप्ता, रायपुर संभाग के लिए डॉ. जावेद शाह, बस्तर संभाग के लिए डॉ. अर्चना सिंह, बिलासपुर संभाग के लिए भूपेंद्र कुमार पटेल तथा सरगुजा संभाग के लिए डॉ. एस.एन. पाण्डेय को संभागीय नोडल ऑफिसर एवं राज्य स्तरीय सदस्य नियुक्त किया गया है।
इन अधिकारियों के माध्यम से प्रदेश के विभिन्न संभागों में प्रशिक्षण कार्यक्रम की गतिविधियों का समन्वय किया जा रहा है। इससे महाविद्यालय स्तर पर प्रशिक्षण के संचालन, प्रशिक्षकों की उपलब्धता तथा विद्यार्थियों की सहभागिता सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में अभिनव कदम: प्रदेश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ विद्यार्थियों के कौशल विकास को प्राथमिकता दी जा रही है। इसी दिशा में अंग्रेजी संप्रेषण क्षमता विकास का यह विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम एक अभिनव प्रयास के रूप में सामने आया है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, व्यावहारिक ज्ञान, कौशल आधारित शिक्षा और जीवनोपयोगी क्षमताओं को विकसित करने पर विशेष महत्व दिया जाता है। अंग्रेजी संप्रेषण क्षमता का विकास भी विद्यार्थियों को आधुनिक शैक्षणिक एवं व्यावसायिक परिस्थितियों के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
इस प्रशिक्षण के माध्यम से विद्यार्थियों को भाषा संबंधी ज्ञान के साथ-साथ व्यवहारिक संवाद कौशल विकसित करने का अवसर प्राप्त होगा। इससे वे उच्च शिक्षा के विभिन्न अवसरों, रोजगार संबंधी गतिविधियों तथा सामाजिक एवं संस्थागत संवाद में अधिक प्रभावी ढंग से सहभागिता कर सकेंगे।
प्रदेश के जनजातीय, ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में स्थित महाविद्यालयों के विद्यार्थियों को समान अवसर प्रदान करने की दिशा में भी यह कार्यक्रम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा पहचानने, अपनी क्षमता पर विश्वास करने तथा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया जा सकेगा।
राज्य एवं संभाग स्तर पर मास्टर ट्रेनर्स का प्रशिक्षण पूरा: कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन के लिए प्रशिक्षण की पूर्व तैयारी भी पूरी कर ली गई है। प्रदेश स्तर पर राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर्स तथा संभाग स्तर पर संभागीय मास्टर ट्रेनर्स का प्रशिक्षण कार्य पूरा हो चुका है।
प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर्स के माध्यम से महाविद्यालयों में अंग्रेजी संप्रेषण क्षमता विकास का प्रशिक्षण संचालित किया जा रहा है। इस व्यवस्था से प्रशिक्षण कार्यक्रम को प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों तक पहुंचाने और निर्धारित समयावधि में विद्यार्थियों को प्रशिक्षण प्रदान करने में सहायता मिल रही है।
महाविद्यालय स्तर पर शिक्षकों को प्रशिक्षित करना इस कार्यक्रम की एक महत्वपूर्ण विशेषता है। इससे विद्यार्थियों को प्रशिक्षण देने के लिए आवश्यक शैक्षणिक तैयारी और समन्वय सुनिश्चित किया जा सकेगा। प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों में स्थित महाविद्यालयों के समस्त प्राध्यापक, शिक्षक एवं अतिथि शिक्षक प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं। इस प्रकार प्रशिक्षण कार्यक्रम के संचालन के लिए आवश्यक शिक्षक तैयारी का कार्य पूरा किया जा चुका है।
शिक्षकों के प्रशिक्षण के बाद अब विद्यार्थियों को अंग्रेजी संप्रेषण क्षमता विकसित करने के लिए प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। इससे महाविद्यालय स्तर पर कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से संचालित करने में मदद मिल रही है। प्रथम चरण में प्रत्येक महाविद्यालय से 100 विद्यार्थियों का चयन: प्रशिक्षण कार्यक्रम के प्रथम चरण में प्रदेश के महाविद्यालयों से कुल छात्र संक्या का 10% प्रशिक्षार्थी अथवा 100 प्रशिक्षार्थी, जो भी कम हो, का चयन किया गया है। चयनित विद्यार्थियों को अंग्रेजी संप्रेषण क्षमता विकास के लिए प्रशिक्षण 3 नवम्बर 2026 से प्रदान किया जा रहा है।
कार्यक्रम के अंतर्गत कम छात्र संख्या वाले महाविद्यालयों में भी न्यूनतम 30 विद्यार्थियों का चयन कर प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विद्यार्थियों की संख्या कम होने के कारण किसी महाविद्यालय को प्रशिक्षण कार्यक्रम से वंचित न रहना पड़े।
प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रदेश के अधिकांश महाविद्यालयों में प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारंभ हो चुका है। इससे विद्यार्थियों को अंग्रेजी भाषा में संवाद करने और अपनी संप्रेषण क्षमता विकसित करने के लिए अवसर मिल रहा है।
प्रशिक्षण के माध्यम से विद्यार्थियों को अंग्रेजी भाषा के प्रयोग में सहजता लाने तथा अपने विचारों को स्पष्ट रूप से व्यक्त करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। यह पहल विशेष रूप से उन विद्यार्थियों के लिए उपयोगी मानी जा रही है, जिन्हें अंग्रेजी में बातचीत करने का पर्याप्त अवसर नहीं मिल पाता।
जनजातीय एवं ग्रामीण छात्राओं के लिए विशेष महत्व: इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का महत्व जनजातीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के लिए विशेष रूप से उल्लेखनीय है। इन क्षेत्रों के अनेक विद्यार्थी उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद भी अंग्रेजी भाषा में संवाद करने के अवसरों की कमी के कारण अपनी प्रतिभा और योग्यता को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत नहीं कर पाते।
विशेषकर जनजातीय एवं ग्रामीण छात्राओं के लिए यह कार्यक्रम आत्मविश्वास बढ़ाने और व्यक्तित्व विकास की दिशा में महत्वपूर्ण अवसर प्रदान कर सकता है।
शासकीय एवं अशासकीय सेवाओं में भर्ती प्रक्रिया के दौरान व्यक्तिगत साक्षात्कार, समूह चर्चा तथा विभिन्न प्रकार की संवादात्मक गतिविधियों में अंग्रेजी संप्रेषण क्षमता उपयोगी साबित हो सकती है। ऐसे में विद्यार्थियों को प्रशिक्षण के माध्यम से संवाद कौशल विकसित करने का अवसर उपलब्ध कराना उनके भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है।
इसके अतिरिक्त दैनिक जीवन में अंग्रेजी भाषा का प्रयोग करते हुए संवाद करना, अपने विचारों को प्रस्तुत करना और विभिन्न परिस्थितियों में आत्मविश्वास के साथ बातचीत करना भी इस कार्यक्रम के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है।
इस पहल से विद्यार्थियों में अंग्रेजी भाषा के प्रति झिझक कम करने तथा उन्हें अपनी क्षमताओं पर विश्वास करने के लिए प्रेरित करने की अपेक्षा की जा रही है।
विद्यार्थियों एवं अभिभावकों में उत्साह: उच्च शिक्षा मंत्री माननीय टंकराम वर्मा की प्रेरणा से संचालित इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम को प्रदेश के विद्यार्थियों के कौशल विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।
इस कार्यक्रम को लेकर प्रदेश के छात्र-छात्राओं में हर्ष एवं उत्साह का वातावरण है। विद्यार्थियों को अंग्रेजी संप्रेषण क्षमता विकसित करने के लिए विशेष प्रशिक्षण उपलब्ध होने से उनके शैक्षणिक एवं व्यावसायिक भविष्य को लेकर सकारात्मक उम्मीदें व्यक्त की जा रही हैं।
अभिभावकों ने भी इस पहल को सकारात्मक कदम बताया है। उनका मानना है कि अंग्रेजी भाषा में संवाद करने की क्षमता विकसित होने से विद्यार्थियों को आगे की पढ़ाई, रोजगार और विभिन्न प्रतियोगी गतिविधियों में लाभ मिल सकता है।
जनजातीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षा के अवसरों को व्यापक बनाने तथा उन्हें आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने में सहायक हो सकते हैं।
उच्च शिक्षा संचालनालय के निर्देशन में कार्यक्रम का संचालन: सम्पूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम का प्रशासनिक समन्वय उच्च शिक्षा संचालनालय के अंतर्गत आर.क्यू.आई.ए.सी.सी./रूसा के रूसा के संयुक्त निदेशक एवं अन्य सदस्यों के माध्यम से किया जा रहा है।
उच्च शिक्षा आयुक्त श्रीमती रीता यादव के निर्देशन में कार्यक्रम की गतिविधियों का समन्वय किया जा रहा है। राज्य समन्वयक, संभागीय नोडल अधिकारियों, मास्टर ट्रेनर्स एवं महाविद्यालयों के शिक्षकों के सहयोग से प्रशिक्षण कार्यक्रम को प्रदेश स्तर पर संचालित किया जा रहा है। इस व्यवस्था का उद्देश्य प्रशिक्षण कार्यक्रम को निर्धारित समयावधि में प्रभावी रूप से पूरा करना तथा विद्यार्थियों तक अंग्रेजी संप्रेषण क्षमता विकास के अवसर पहुंचाना है।
विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण पहल: छत्तीसगढ़ के जनजातीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित महाविद्यालयों में अंग्रेजी संप्रेषण क्षमता विकास के लिए प्रारंभ किया गया यह 90 दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम विद्यार्थियों के कौशल विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
90 घंटे के इस प्रशिक्षण के माध्यम से विद्यार्थियों को अंग्रेजी भाषा में संवाद करने, आत्मविश्वास बढ़ाने तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संपर्क स्थापित करने की क्षमता विकसित करने का अवसर मिलेगा।
प्रदेश स्तर पर प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर्स, संभागीय नोडल अधिकारियों एवं महाविद्यालयों के शिक्षकों की सहभागिता से कार्यक्रम को प्रभावी बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
यह पहल विद्यार्थियों को केवल भाषा सीखने तक सीमित नहीं रखती, बल्कि उन्हें अपने विचारों को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करने, अपनी प्रतिभा पर विश्वास करने और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार होने की दिशा में प्रेरित करती है। विशेष रूप से जनजातीय एवं ग्रामीण छात्राओं सहित उन विद्यार्थियों के लिए यह प्रशिक्षण महत्वपूर्ण अवसर प्रदान कर सकता है, जो अपनी शैक्षणिक योग्यता के बावजूद संवाद संबंधी झिझक का सामना करते हैं।
प्रदेश में उच्च शिक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, कौशल संवर्धन और आत्मविश्वास निर्माण की दिशा में यह कार्यक्रम एक सकारात्मक पहल के रूप में सामने आया है। आने वाले समय में इसके माध्यम से विद्यार्थियों को शिक्षा, रोजगार एवं सामाजिक सहभागिता के विभिन्न अवसरों के लिए अधिक सक्षम बनाने की उम्मीद व्यक्त की जा रही है। इस प्रकार छत्तीसगढ़ में अंग्रेजी संप्रेषण क्षमता विकास का यह विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम विद्यार्थियों को आत्मविश्वास, संवाद कौशल और व्यक्तित्व विकास के नए अवसर प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण शासकीय प्रयास है।



