बिलासपुर। भारतीय जनता पार्टी द्वारा आयोजित ‘लोकतंत्र बचाओ–अराजकता हटाओ’ पदयात्रा में केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू शामिल हुए। गांधी चौक से नेहरू चौक तक निकाली गई पदयात्रा के दौरान उन्होंने लोकतंत्र की मजबूती, संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और निष्पक्ष चुनाव के प्रति जन-जागरूकता का आह्वान किया।
सभा को संबोधित करते हुए श्री साहू ने कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती के लिए निर्वाचन आयोग, सर्वोच्च न्यायालय सहित सभी संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और गरिमा का सम्मान जरूरी है।
उन्होंने 25 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार द्वारा लगाए गए आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र का काला अध्याय बताते हुए कहा कि उस दौरान नागरिक स्वतंत्रताओं पर प्रतिबंध लगाए गए और प्रेस की आजादी प्रभावित हुई। नई पीढ़ी को इस इतिहास से परिचित कराना आवश्यक है।
श्री साहू ने डॉ. भीमराव आंबेडकर के राजनीतिक जीवन तथा वर्ष 1946 में कांग्रेस अध्यक्ष पद के चयन से जुड़े सरदार वल्लभभाई पटेल के प्रसंगों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद 560 से अधिक रियासतों के एकीकरण में सरदार पटेल की भूमिका ऐतिहासिक रही है। ऐसे राष्ट्रनिर्माताओं के योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना चाहिए।
SIR को बताया पुरानी निर्वाचन प्रक्रिया
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर उन्होंने कहा कि यह कोई नई प्रक्रिया नहीं है। नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, पी.वी. नरसिम्हा राव और अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में भी अलग-अलग समय पर मतदाता सूची का गहन पुनरीक्षण किया गया है। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य मतदाता सूची को शुद्ध, अद्यतन और विश्वसनीय बनाना है। मृत एवं दोहरी प्रविष्टियों की पहचान के साथ यह भी सुनिश्चित होना चाहिए कि किसी पात्र मतदाता का नाम सूची से न छूटे।
केंद्रीय राज्यमंत्री ने कहा कि चुनाव आयोग और संवैधानिक संस्थाओं के कार्यों पर तथ्यों के आधार पर चर्चा होनी चाहिए। युवाओं को लोकतंत्र, संविधान और नागरिक अधिकारों के प्रति जागरूक करना समय की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत @2047 का लक्ष्य हासिल करने के लिए मजबूत लोकतंत्र, पारदर्शी व्यवस्था और जागरूक नागरिक जरूरी हैं। राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर राष्ट्रहित, संविधान की गरिमा और लोकतांत्रिक संस्थाओं का सम्मान करना सभी की जिम्मेदारी है।



