धूप में निकलने से पहले सर व कानों को कपड़े से अच्छी तरह से बांध ले
राजनांदगांव । गर्मी के मौसम को देखते हुए लू से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा मार्गदर्शन दिया गया है। जब वातावरण का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या 104 डिग्री फेरनहाइट से ज्यादा हो तो हीट वेव की स्थिति उत्पन्न होती है, जिसे सामान्य भाषा में लू चलना कहा जाता है। इसका असर बच्चों, बुजर्गों एवं […]
राजनांदगांव । गर्मी के मौसम को देखते हुए लू से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा मार्गदर्शन दिया गया है। जब वातावरण का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या 104 डिग्री फेरनहाइट से ज्यादा हो तो हीट वेव की स्थिति उत्पन्न होती है, जिसे सामान्य भाषा में लू चलना कहा जाता है। इसका असर बच्चों, बुजर्गों एवं कोमार्बिड लोगों में सर्वाधिक होता है। हमारे शरीर के टेम्परेचर रेग्यूलेशन (तापमान नियंत्रण) मस्तिष्क के हाईपोथलेमस भाग से होता है। जब वातावरण 40 डिग्री सेल्सियस या 104 डिग्री फेरनहाइट से अधिक हो जाता है, तब टेम्पेरचर रेग्यूलेशन तंत्र प्रभावित होता है। परिणामस्वरूप तब हीट स्ट्रोक की स्थिति उत्पन्न होती है।

About The Author
Related Posts
