त्वरित टिप्पणी : जांजगीर में सत्ता का जश्न, सौगात शून्य
जनादेश का पर्व, जनता ख़ाली हाथ
जांजगीर।
छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार के दो वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर 22 दिसंबर को जांजगीर में आयोजित जनादेश परब सत्ता के उत्सव से ज़्यादा आत्मप्रचार का मंच बनकर रह गया। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सहित पूरी साय कैबिनेट की मौजूदगी के बावजूद न जांजगीर जिले को और न ही पूरे छत्तीसगढ़ को एक ढेले की सौगात मिल सकी।
भारी-भरकम मंच, प्रशासनिक संसाधन और जुटाई गई भीड़ के बीच नेताओं ने अपने ही कार्यकाल का गुणगान किया। मंच से विकास, सुशासन और उपलब्धियों के दावे किए गए, लेकिन जमीनी हकीकत पर कोई नई घोषणा या ठोस समाधान सामने नहीं आया। राष्ट्रीय अध्यक्ष नड्डा ने भी वही रटे-रटाए जुमले दोहराए, जिन्हें जनता पहले भी सुन चुकी है।
आरोप है कि यह आयोजन जनता के पैसे और प्रशासनिक तंत्र की बैसाखी पर करोड़ों के तमाशे में तब्दील हो गया। कर्मचारी वर्ग आज भी अपनी लंबित मांगों को लेकर संघर्षरत है, प्रदेश में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति जस की तस बनी हुई है, लेकिन मंच से छत्तीसगढ़ को खुशहाल बताने में कोई कमी नहीं छोड़ी गई।
सभा में जुटाई गई भीड़ को लेकर भी सवाल उठे हैं। राजनीतिक हलकों का कहना है कि यह दिखावे का पर्व था, जिसमें जनादेश का सम्मान कम और सत्ता का प्रदर्शन अधिक नजर आया। दो वर्षों के कार्यकाल के बाद भी जब न जिले को कुछ मिला और न प्रदेश को, तो अब यह सवाल उठना लाज़मी है कि क्या भाजपा अगली बार भी इसी जनादेश के भरोसे ऐसा पर्व मना पाएगी, या जनता आने वाले समय में सत्ता से उसका असली हिसाब मांगेगी।

