ग्राम पंचायतों से लेकर जनपद कार्यालय तक सरपंच पतियों का दखल
महज रबर स्टैम्प बनी महिलाएं सरपंच ग्राम पंचायतों में अधिकांश महिला सरपंच के पति व अन्य रिश्तेदार करने लगे है पंचायती – :: – पाली से ज्ञान शंकर तिवारी – :: – कोरबा-पाली// जिले […]
महज रबर स्टैम्प बनी महिलाएं सरपंच
ग्राम पंचायतों में अधिकांश महिला सरपंच के पति व अन्य रिश्तेदार करने लगे है पंचायती
– :: – पाली से ज्ञान शंकर तिवारी – :: –
कोरबा-पाली//
जिले के जनपद पंचायत पाली अंतर्गत लगभग 50 प्रतिशत ग्राम पंचायतों में महिलाएं सरपंच निर्वाचित हुई है। लेकिन अधिकांश जगह उनके पति व अन्य रिश्तेदार पंचायती करने लगे है। यहां तक कि जनपद पंचायत कार्यालय की बैठकें अथवा अन्य कार्यालयीन कार्यों में भी दखल देखने को मिल रहा है। जबकि निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधि की भूमिका सिर्फ साइन करने या अंगूठा लगाने तक सीमित रह गई है। वहीं जरूरत पड़ने पर पति ही अपनी सरपंच पत्नी का फर्जी हस्ताक्षर करने में भी कोई गुरेज नही करते। जबकि पंचायतीराज विभाग इसे आपराधिक कृत्य मानता है और मुकदमा भी दर्ज हो सकता है। जानकारी के मुताबित यदि पंचायत में निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधि के स्थान पर उनके पति, निकट संबंधी, रिश्तेदार व अन्य का दखल रहता है तो कार्रवाई के अधिकार ग्राम पंचायत में सचिव, पंचायत समिति में बीडीओ और जिला परिषद में सीईओ के पास होता है। पाली जनपद में अक्सर निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के पतियों अथवा अन्य रिश्तेदारों का दखल देखने को मिलता है, जिस पर रोक लगाने वाला कोई नही है। ऐसे में ग्राम पंचायत से लेकर जनपद पंचायत कार्यालय तक बेखौफ सरपंच पतियों की धमक है। बता दें कि पंचायतों में महिला जनप्रतिनिधि के स्थान पर उनके पति या रिश्तेदारों के हस्तक्षेप मामले को लेकर भारत सरकार पंचायती राज मंत्रालय, नई दिल्ली ने कड़े रुख अख्तियार कर फैसले लिए है। जिसमे राज्य सरकार को पत्र जारी कर कहा गया है कि छत्तीसगढ़ प्रदेश के ग्रामीण पंचायतों में महिला पंचायत पदाधिकारियों की भागीदारी 50 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है। निर्वाचित महिला पंचायत पदाधिकारियों को पंचायतों के कामकाज यथा नियोजन, क्रियान्वयन, पर्यवेक्षण, नियंत्रण आदि में स्वयं निर्णय लेने हेतु पंचायत संचालन के दौरान पंचायत कार्यालय परिसर के भीतर महिला पंचायत पदाधिकारियों को उनके कोई भी सगे संबंधी/रिश्तेदार पंचायत के किसी कार्य मे हस्तक्षेप/दखलअंदाजी नही करेंगे। किसी विषय पर किसी भी पदाधिकारी/कर्मियों को महिला पंचायत पदाधिकारी की ओर से निर्णय लेकर सुझाव/निर्देश नही देंगे, अन्यथा संबंधित महिला पंचायत पदाधिकारियों के विरुद्ध पंचायतराज अधिनियम 1993 में उल्लेखित प्रावधान अनुसार कार्यवाही की जावेगी। राज्य शासन द्वारा जिस पत्र के परिपालन में सभी जिले के कलेक्टर को निर्देश प्रति भेजकर उसका पालन सुनिश्चित कराने कहा गया है। लेकिन पाली सीईओ की निष्क्रियता और कर्तव्यों के प्रति उदासीनता से उन निर्देशों का अंश भर पालन नही हो रहा, बल्कि पंचायतों में निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधियों के पति या परिवार के अन्य सदस्य अथवा रिश्तेदार ही पंचायत का संचालन कर रहे है। पंचायत भवन में उनकी कुर्सी पर बैठने और सारे निर्णय लेने के साथ उनके हस्ताक्षर भी कर रहे है। वहीं पंचायती कार्य लेकर जनपद कार्यालय भी पहुँच रहे है, जो सर्वेसर्वा बने हुए है। वहीं जनपद सीईओ मौंन साधे बैठे है।
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