सहकारिता सचिव ने की मक्का प्रसंस्करण संयंत्र की प्रगति की समीक्षा

कोंडागांव । सहकारिता विभाग के सचिव डॉ. सीआर प्रसन्ना ने कोकोड़ी में निर्माणाधीन मक्का प्रसंस्करण संयंत्र के प्रगति की समीक्षा की। जिला कार्यालय के भू-तल स्थित सभाकक्ष में गुरुवार को संयंत्र के विभिन्न इकाइयों के प्रगति की जानकारी ली और कार्य को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। इस अवसर पर कलेक्टर कुणाल दुदावत भी उपस्थित […]

कोंडागांव । सहकारिता विभाग के सचिव डॉ. सीआर प्रसन्ना ने कोकोड़ी में निर्माणाधीन मक्का प्रसंस्करण संयंत्र के प्रगति की समीक्षा की। जिला कार्यालय के भू-तल स्थित सभाकक्ष में गुरुवार को संयंत्र के विभिन्न इकाइयों के प्रगति की जानकारी ली और कार्य को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। इस अवसर पर कलेक्टर कुणाल दुदावत भी उपस्थित थे।

डॉ. प्रसन्ना ने संयंत्र के संचालन हेतु आवश्यक सभी विधिक अनुमतियां प्राप्त करने के लिए आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने इसके साथ ही मक्के की खरीदी एवं उसके भंडारण की व्यवस्था तथा मानव संसाधन की उपलब्धता के संबंध में भी चर्चा की। किसानों को अधिक से अधिक लाभ के लिए बेहतर मॉडल के साथ संयंत्र के संचालन के लिए निर्देशित किया। उन्होंने संयंत्र के संचालन हेतु विद्युत सहित आवश्यक सामग्री की व्यवस्था के संबंध में भी समीक्षा की। इसके साथ ही संयंत्र से उत्पादित अन्य अवयवों के उचित निस्तारण की योजना के संबंध में भी जानकारी ली।

कलेक्टर दुदावत ने इस अवसर पर बताया कि शीघ्र ही साईलो के भराव का कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा। उन्होने बताया कि मक्का खरीदी हेतु सीधे संयंत्र में व्यवस्था करने के साथ ही समितियों के माध्यम से भी मक्का खरीदी की कार्ययोजना तैयार की जा रही है तथा मक्का भंडारण के लिए गोदामों का निर्माण भी किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि कोकोड़ी में मक्का प्रसंस्करण संयंत्र का निर्माण अंतिम चरणों में है तथा कुछ इकाइयों का निर्माण पूर्ण हो चुका है, जिसकी टेस्टिंग का कार्य शेष है। इस संयंत्र के माध्यम से प्रतिदिन 80 हजार लीटर एथेनॉल का उत्पादन किया जाएगा, जिसके लिए लगभग 200 मीट्रिक टन मक्का की आवश्यकता होगी। इस संयंत्र से बिल्कुल भी अपशिष्ट का उत्पादन नहीं होगा वहीं संयंत्र में एथेनॉल के अतिरिक्त उत्पादित अन्य सामग्री से पशुओं के लिए चारा बनाया जाएगा। संयंत्र के संचालन हेतु बाहरी विद्युत की आवश्यकता नहीं होगी, क्योंकि यह संयंत्र अपने संचालन के लिए ऊर्जा का उत्पादन स्वयं करेगा।

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