हाईकोर्ट ने दहेज हत्या केस में कम की सजा
बिलासपुर। गला घोंटकर पत्नी की जान लेने के एक मामले में हाई कोर्ट ने साक्ष्य का परीक्षण के बाद मामले को दहेज हत्या का माना। हाई कोर्ट ने अपीलकर्ता को आजीवन कारावास से कम करते हुए दहेज हत्या के आरोप में सजा 10 वर्ष कर दी है। मुंगेली सिटी कोतवाली क्षेत्र के फास्टरपुर चौकी के ग्राम […]
बिलासपुर। गला घोंटकर पत्नी की जान लेने के एक मामले में हाई कोर्ट ने साक्ष्य का परीक्षण के बाद मामले को दहेज हत्या का माना। हाई कोर्ट ने अपीलकर्ता को आजीवन कारावास से कम करते हुए दहेज हत्या के आरोप में सजा 10 वर्ष कर दी है।

निर्णय के विरुद्ध आरोपी ने हाईकोर्ट में अपील की। इसमें कहा गया कि मामला दहेज हत्या का है व धारा 304 बी में सजा 7 वर्ष होनी चाहिए। आरोपी 10 वर्ष से जेल में है। उसे रिहा करने की मांग की गई।
हाई कोर्ट ने आरोपी को किस धारा में सजा होनी चाहिये इस पर विचार करने अदालत की सहायता के लिए अधिवक्ता आशीष तिवारी को न्याय मित्र नियुक्त किया। न्याय मित्र ने विभिन्न हाई कोर्ट सुप्रीम कोर्ट के न्याय दृष्टांत को पेश किए। उन्होंने मृतका के पिता व अन्य गवाहों के बयान के आधार पर मामले को दहेज हत्या का बनना बताया।सजा के प्रश्न पर दहेज हत्या के दुर्लभ मामले में आजीवन कारावास की सजा हो सकती है। हाई कोर्ट ने सभी पक्षों के तर्क व न्यायदृष्टांत को सुनने के बाद अपने आदेश में कहा आरोपी पुलिस कर्मचारी था और अपराध में अंकुश लगाने के बजाय खुद शामिल हो गया। इसलिए मामले में गंभीरता से विचार करना होगा। दुर्लभ मामला होने पर आरोपी को आजीवन कारावास हो सकता है किंतु यह दुर्लभ नहीं है। न्याय की पूर्ति के लिए आरोपी की धारा 304 बी की 7 वर्ष की सजा को बढ़ाकर 10 वर्ष किया गया। आरोपी 30 सितंबर 2013 से जेल में बंद है। कोर्ट ने 10 वर्ष पूरा होने पर उसे रिहा करने का निर्देश दिया।
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